लखनऊ । उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित ओबरा डी और अनपरा ई ताप विद्युत परियोजनाओं को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से बड़ा निर्णय लेने की मांग की है। समिति ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से अपील करते हुए कहा है कि इन परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के बजाय राज्य के हित में सीधे राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए, ताकि काम तेजी से शुरू हो सके और प्रदेश को सस्ती बिजली मिल सके।

इन परियोजनाओं को स्थापित करने का समझौता हुआ था

संघर्ष समिति का कहना है कि फरवरी 2023 में ग्लोबल समिट के दौरान NTPC Limited के साथ ज्वाइंट वेंचर के तहत इन परियोजनाओं को स्थापित करने का समझौता हुआ था। इसके तहत 2×800 मेगावाट क्षमता की ओबरा डी और 2×800 मेगावाट क्षमता की अनपरा ई ताप विद्युत परियोजनाएँ स्थापित की जानी थीं। लेकिन समझौते के तीन साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।

उत्पादन की लागत 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट

समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर इस तरह की ताप विद्युत परियोजनाएँ लगभग पांच साल में पूरी हो जाती हैं। लेकिन ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी मिलने के तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद काम शुरू न होना प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है। इससे परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी यानी कॉस्ट ओवररन होने की आशंका भी जताई गई है, जिससे सैकड़ों करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो सकते हैं।संघर्ष समिति का दावा है कि यदि इन परियोजनाओं को राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंप दिया जाए तो पहले से मौजूद बुनियादी ढांचे और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा सकेगा। इससे बिजली उत्पादन की लागत 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो सकती है, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं को मिलेगा।

राज्य सरकार ने पहले ज्वाइंट वेंचर का निर्णय लिया था

समिति ने उदाहरण देते हुए बताया कि Madhya Pradesh में अमरकंटक परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने पहले ज्वाइंट वेंचर का निर्णय लिया था। लेकिन दो साल तक प्रगति न होने पर वहां की सरकार ने ज्वाइंट वेंचर को समाप्त कर परियोजना को अपने राज्य के उत्पादन निगम को सौंपने का फैसला किया।संघर्ष समिति के अनुसार वर्तमान में इन परियोजनाओं के लिए कोयला लिंकेज भी सुनिश्चित नहीं हो सका है। अभी तक Northern Coalfields Limited से कोल पिटहेड लिंकेज नहीं मिल पाया है, जिसके कारण लगभग 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने की संभावना बन रही है। इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और बिजली उत्पादन महंगा हो जाएगा।

केवल एक ही रेलवे लाइन और एक ही ऐश पोंड उपलब्ध

समिति ने यह भी आशंका जताई कि एक ही परिसर में दो अलग-अलग स्वामित्व वाली परियोजनाएँ बनने से संचालन से जुड़ी कई समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। विशेष रूप से कोयला आपूर्ति और राख (ऐश) के निस्तारण को लेकर भविष्य में विवाद और परिचालन संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं, क्योंकि परिसर में फिलहाल केवल एक ही रेलवे लाइन और एक ही ऐश पोंड उपलब्ध है।

बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को दोहराया

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के हित में ज्वाइंट वेंचर प्रस्ताव को निरस्त कर ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को तत्काल राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए, ताकि परियोजनाएँ समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकें और प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके।इधर, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन भी लगातार जारी है। आंदोलन के 471वें दिन प्रदेश के सभी जिलों में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को दोहराया।

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