अयोध्या । पावन नगरी अयोध्या में आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण दर्ज हुआ, जब द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना कर देश के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
विधि-विधान के साथ हुआ अनुष्ठान
राष्ट्रपति के अयोध्या पहुंचते ही उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने आद्य शंकराचार्य द्वार से मंदिर परिसर में प्रवेश किया। सबसे पहले रामलला के दरबार में पहुंचकर उन्होंने दर्शन और आरती की।
इसके पश्चात वे मंदिर के दूसरे तल पर पहुंचीं, जहां वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच अभिजीत मुहूर्त में श्रीराम यंत्र की स्थापना और पूजन संपन्न हुआ। यह यंत्र धार्मिक और वास्तुशास्त्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी, संत-धर्माचार्य और देशभर से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने कारसेवक भी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
श्रद्धालुओं में उत्साह, दर्शन व्यवस्था में बदलाव
राष्ट्रपति के कार्यक्रम के चलते सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक लगाई गई। हालांकि, भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन का समय बढ़ा दिया, जिससे अधिक से अधिक लोग रामलला के दर्शन कर सकें।
अभेद्य सुरक्षा घेरा
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे शहर को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया। अयोध्या को 13 जोन और 37 सेक्टर में विभाजित कर लगभग 3000 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तैनाती की गई।एयरपोर्ट, मंदिर परिसर, अतिथि मार्ग, छतों (रूफटॉप) और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।
ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव
यातायात को सुचारु रखने के लिए 18 मार्च से भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। रूट डायवर्जन भी लागू किया गया, जिससे वीआईपी मूवमेंट और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु, संत और मंदिर निर्माण से जुड़े लोग शामिल हुए। बताया गया कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले हजारों लोगों में से बड़ी संख्या में लोग इस अवसर पर मौजूद रहे।
चार घंटे का दौरा, ऐतिहासिक संदेश
राष्ट्रपति का यह दौरा लगभग चार घंटे का रहा, जिसमें उन्होंने पूजा-अर्चना के साथ-साथ सभा को भी संबोधित किया।यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि देश में आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का भी बड़ा संदेश देने वाला साबित हुआ।कुल मिलाकर, अयोध्या में आज का दिन आध्यात्मिक गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में याद किया जाएगा, जब देश की प्रथम नागरिक की मौजूदगी में राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना संपन्न हुअा।
