लखनऊ । रिजर्व पुलिस लाइन में सोमवार को जाली मुद्रा के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें लखनऊ पुलिस के उपनिरीक्षकों को अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए फर्जी नोटों की पहचान और कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया गया।यह कार्यशाला Amrendra Kumar Sengar के निर्देश और संयुक्त पुलिस आयुक्त Aparna Kumar व Bablu Kumar के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त Kamlesh Dixit और Anil Kumar Yadav की देखरेख में प्रशिक्षण संपन्न हुआ, जबकि संचालन सहायक पुलिस आयुक्त Saumya Pandey ने किया।
इस कार्यशाला में 95 उपनिरीक्षकों ने हिस्सा लिया
Reserve Bank of India के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में 95 उपनिरीक्षकों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को भारतीय करेंसी की सुरक्षा विशेषताओं—ओवर्ट, कवर्ट और मशीन-पठनीय तत्वों—के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही सिक्योरिटी थ्रेड, ऑप्टिकल फाइबर, इंटैग्लियो प्रिंटिंग और नंबरिंग तकनीकों की गहराई से जानकारी दी गई, जिससे असली और नकली नोटों में अंतर तुरंत समझा जा सके।विशेष सत्र में FICN (Fake Indian Currency Notes) से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया, जब्ती की कार्यवाही और फोरेंसिक परीक्षण के लिए नोट भेजने की SOP पर चर्चा की गई।
पुलिस को तकनीकी रूप से और अधिक सतर्क रहने की जरूरत
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जाली नोट की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए नेटवर्क तक पहुंचना प्राथमिकता होनी चाहिए।कार्यशाला में हाई क्वालिटी काउंटरफीट नोट्स (HQCN) के बढ़ते खतरे पर भी फोकस किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि संगठित अपराधी गिरोह अब अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में पुलिस को तकनीकी रूप से और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने माना कि यह प्रशिक्षण न केवल उनकी जांच क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि जाली मुद्रा के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में भी अहम भूमिका निभाएगा।
