लखनऊ । पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की ‘Specialized Training’ शाखा द्वारा मंगलवार को रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश शासन एवं पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित हुआ।

पुलिस उपायुक्त कमलेश दीक्षित के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ

यह प्रशिक्षण पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त अपर्णा कुमार, बबलू कुमार, पुलिस उपायुक्त कमलेश कुमार दीक्षित और अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/साइबर क्राइम) सौम्या पाण्डेय की देखरेख में किया गया।

डिजिटल जांच के लिए आधुनिक प्रशिक्षण

कार्यशाला में UPATS की सोशल मीडिया सेल के प्रभारी उपनिरीक्षक अरविन्द कुमार वर्मा और उनकी टीम ने करीब 100 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया। इसमें लखनऊ के विभिन्न जोनों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी, साइबर सेल व सर्विलांस टीम के विशेषज्ञ और वर्ष 2023 बैच के उप-निरीक्षक शामिल रहे।

लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाने की तकनीक सिखाई

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को आधुनिक डिजिटल टूल्स जैसे Netgrid, Epieos, DNS Checker और Namint के उपयोग की जानकारी दी गई। इन टूल्स के माध्यम से संदिग्धों के डिजिटल फुटप्रिंट यानी उनकी ऑनलाइन गतिविधियों, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल पहचान के आधार पर उनकी लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाने की तकनीक सिखाई गई।

सोशल मीडिया से साक्ष्य जुटाने की ट्रेनिंग

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जांच के दौरान फ्री सोशल मीडिया टूल्स का प्रभावी उपयोग सिखाना था। वर्तमान समय में अपराधियों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता इस्तेमाल देखते हुए पुलिसकर्मियों को ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) में दक्ष बनाना जरूरी माना गया।प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि किस प्रकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्रित किए जा सकते हैं, जिससे जांच मजबूत और सटीक बन सके।

स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम

इस प्रशिक्षण का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि डिजिटल युग में OSINT तकनीक स्मार्ट पुलिसिंग का अहम हिस्सा बन चुकी है। इसके जरिए पुलिस न केवल जटिल साइबर अपराधों की गुत्थी सुलझा सकेगी, बल्कि संदिग्धों तक तेजी से पहुंचकर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण भी स्थापित कर सकेगी।

पुलिस बल की क्षमता में होगा इजाफा

अधिकारियों के अनुसार इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पुलिसकर्मियों की कार्यकुशलता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। अब लखनऊ पुलिस सोशल मीडिया और डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर अधिक प्रभावी ढंग से साक्ष्य जुटाने में सक्षम हो रही है।इस पहल से न केवल भविष्य में साइबर अपराधों से निपटना आसान होगा, बल्कि यह कदम सुरक्षित और अपराधमुक्त समाज की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा।

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