बाराबंकी । उत्तर प्रदेश में कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग विभागों में नौकरी करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही आरोपी पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी
अभियोजन पक्ष के अनुसार 20 फरवरी 2009 को शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी करते हुए दो अलग-अलग स्थानों पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।मामले का खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी से हुआ था। जांच के दौरान सामने आया कि जयप्रकाश सिंह की नियुक्ति जून 1993 में जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर हुई थी।
आरोपी दोनों जगहों पर नौकरी करता रहा
वहीं इससे पहले 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले में नॉन मेडिकल असिस्टेंट के पद पर भी उनकी नियुक्ति हो चुकी थी। आरोपी दोनों जगहों पर नौकरी करता रहा।मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
