लखनऊ। महान क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवस (23 मार्च) के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मी पावर सेक्टर को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने का संकल्प लेंगे।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेश के सभी जनपदों में सभाएं आयोजित की जाएंगी, जहां कर्मचारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और निजीकरण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

प्रदेश के बिजली कर्मियों ने विद्युत व्यवस्था में लगातार सुधार

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जारी बयान में कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के बिजली कर्मियों ने विद्युत व्यवस्था में लगातार सुधार किया है। खासतौर पर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उनकी रेटिंग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।इसके बावजूद इन वितरण निगमों के निजीकरण के प्रस्ताव को समिति ने जनविरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। समिति का आरोप है कि निजीकरण के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों का पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है, जो निंदनीय है।

विरोध में चल रहा आंदोलन अब 480वें दिन में पहुंच चुका

संघर्ष समिति के अनुसार, निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन अब 480वें दिन में पहुंच चुका है। 23 मार्च को आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियां प्रदेशभर में पूरी कर ली गई हैं।राजधानी लखनऊ में भी इस अवसर पर राणा प्रताप मार्ग स्थित हाइडल फील्ड हॉस्टल परिसर में शाम 4:30 बजे एक महत्वपूर्ण सभा आयोजित की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में बिजली कर्मी एकत्र होकर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे और पावर सेक्टर को सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने का संकल्प दोहराएंगे।

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