लखनऊ । मुरादाबाद के बहुचर्चित मैनाठेर हिंसा मामले में करीब डेढ़ दशक बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। सोमवार को एडीजे-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने तत्कालीन डीआईजी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 16 आरोपियों को दोषी ठहराया। इस मामले में कुल 19 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, लेकिन सुनवाई के दौरान तीन अभियुक्तों की मौत हो चुकी है। अब अदालत 27 मार्च को दोषियों की सजा पर अंतिम निर्णय सुनाएगी।

पुलिस पर धार्मिक ग्रंथ के अपमान का आरोप लगाया

यह मामला 6 जुलाई 2011 का है, जब मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस एक छेड़खानी के आरोपी को पकड़ने पहुंची थी। दबिश के दौरान आरोपी पक्ष ने पुलिस पर धार्मिक ग्रंथ के अपमान का आरोप लगाया, जिसके बाद इलाके में तनाव तेजी से बढ़ गया।स्थिति जल्द ही हिंसक हो गई और उग्र भीड़ ने मुरादाबाद-संभल रोड पर कई स्थानों पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि मैनाठेर थाने और डींगरपुर चौकी पर हमला कर आगजनी की गई, साथ ही पीएसी के वाहनों को भी फूंक दिया गया।

मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी उन्हें छोड़कर पीछे हट गए थे

हिंसा को काबू में करने के लिए तत्कालीन डीएम राजशेखर और डीआईजी अशोक कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके की ओर रवाना हुए थे। डींगरपुर तिराहे पर हालात का जायजा लेने के दौरान भीड़ ने दोनों अधिकारियों को घेर लिया। इस दौरान हमलावरों ने डीआईजी पर फायरिंग कर दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी उन्हें छोड़कर पीछे हट गए थे।

अब अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार दिया

घटना के बाद कई जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर स्थिति पर काबू पाया गया और घायल अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को अस्पताल पहुंचाया गया। इस पूरे प्रकरण में डीआईजी के पीआरओ रवि कुमार की तहरीर पर मुख्य आरोपी कामिल समेत 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि तीन की पहले ही मौत हो चुकी है। आगामी 27 मार्च को अदालत सजा का ऐलान करेगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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