लखनऊ।राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश ने आज पुलिस मुख्यालय, लखनऊ के चिंतन सभागार में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) उत्तर प्रदेश के नए “LOGO” (प्रतीक चिन्ह) का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर डीजीपी ने जीआरपी के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई देते हुए रेलवे सुरक्षा में उनकी भूमिका की सराहना की।

“अंकुश” कार्यशाला का शुभारम्भ

इसी मौके पर “रेलवे सुरक्षा एवं संरक्षा – उभरती चुनौतियाँ” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला “अंकुश” का शुभारम्भ प्रकाश डी, अपर पुलिस महानिदेशक (रेलवे) उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया।उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क है—

करीब 16,000 किमी रेलवे ट्रैक
लगभग 1550 रेलवे स्टेशन
प्रतिदिन करीब 30 लाख यात्री
5 रेलवे जोन और 12 डीआरएम के अंतर्गत संचालन
जीआरपी यूपी के 6 अनुभाग और 65 थाने
इतने बड़े नेटवर्क की सुरक्षा और संरक्षा अपने आप में बड़ी चुनौती है।
अपराध नियंत्रण से भीड़ प्रबंधन तक विशेष फोकस

कार्यशाला में निम्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई

पत्थरबाजी व सेबोटाज की रोकथाम
मानव व मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश
नकली भारतीय मुद्रा (FICN) की रोकथाम
शस्त्र तस्करी नियंत्रण
मिशन शक्ति अभियान
परीक्षा, त्योहार, राजनीतिक रैलियों में भीड़ प्रबंधन
महाकुंभ व कुंभ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था
आधुनिक तकनीक का उपयोग

विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यशाला में कई वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे—
राजीव रंजन (RPF, NR) – सेबोटाज व पत्थरबाजी रोकथाम
विशाल विक्रम सिंह – नकली नोट (FICN) रोकथाम
देवांश शुक्ला – आधुनिक तकनीक का उपयोग
राजेश मणि – एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग
शैलेन्द्र कुमार मिश्र (NCB) – ड्रग्स तस्करी रोकथाम
प्रशान्त वर्मा – प्रबंधन विषय

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यशाला में आर.के. भारद्वाज (पुलिस महानिरीक्षक रेलवे, लखनऊ), एन. कोलंची (पुलिस महानिरीक्षक रेलवे, प्रयागराज) सहित रेलवे पुलिस के राजपत्रित व अराजपत्रित अधिकारी, निरीक्षक, उप-निरीक्षक, आरक्षी एवं महिला पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

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