लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में चल रहे आंदोलन के 450 दिन पूरे होने पर आगामी 20 फरवरी को प्रदेश भर में बिजली कर्मियों द्वारा “विरोध दिवस” मनाया जाएगा।

विरोध दिवस में सभी कर्मचारी रहेंगे शामिल

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि “विरोध दिवस” के दौरान सभी ऊर्जा निगमों के नियमित कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर तथा अभियंता अपने-अपने जनपदों, परियोजनाओं और कार्यस्थलों पर भोजनावकाश अथवा कार्यालय समय के उपरांत शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे।

निजीकरण की समस्त प्रक्रिया तत्काल निरस्त हो

संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से कहा है कि जब प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा ने विधानसभा में स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य की विद्युत व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है तथा 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, तो ऐसी स्थिति में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को झूठी प्रतिष्ठा की जिद छोड़ते हुए निजीकरण की समस्त प्रक्रिया तत्काल निरस्त कर देनी चाहिए, ताकि ऊर्जा निगमों में स्वस्थ एवं सकारात्मक कार्य वातावरण स्थापित हो सके।

बिजली कर्मियों का लगातार किया जा रहा उत्पीड़न

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों के विरुद्ध लगातार उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है। इसके बावजूद बिजली कर्मी आंदोलन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दे रहे हैं और भविष्य में भी उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आंदोलन जारी रखा जाएगा।

आज आंदोलन के 447वें दिन प्रदेश भर में जारी

संघर्ष समिति ने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के मन में वास्तव में विद्युत व्यवस्था में सुधार तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करने की भावना है, तो निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए, जिससे बिजली कर्मी पूरी निष्ठा और मनोयोग के साथ विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में योगदान दे सकें। आज आंदोलन के 447वें दिन प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों द्वारा व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया।

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