लखनऊ । प्रदेश में करीब 5000 मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयां बंद होने से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। बंद इकाइयों के पीछे कम बिजली मांग (लो डिमांड) और कुछ रिवर्स शटडाउन (RSD), प्लांट शटडाउन (AOH) या मरम्मत कार्य को कारण बताया जा रहा है।

उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही 24 घंटे बिजली

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर उपभोक्ता से फिक्स चार्ज लिया जाता है और केंद्रीय उपभोक्ता अधिकार नियमावली 2020 के तहत उन्हें 24 घंटे बिजली मिलना अनिवार्य है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे का रोस्टर लागू है, लेकिन वास्तविकता में उपभोक्ताओं को केवल 10-12 घंटे बिजली मिल रही है।अवधेश कुमार वर्मा ने चेतावनी दी कि अगर सभी उत्पादन इकाइयों को चलाकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली नहीं दी गई, तो उपभोक्ता हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

बंद इकाइयों का विवरण

राज्य विद्युत उत्पादन निगम की कई प्रमुख इकाइयां बंद हैं, जिनमें शामिल हैं:

अनपरा थर्मल पावर स्टेशन

हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा सी और परीछा थर्मल इकाइयां

टांडा थर्मल की चारों इकाइयां

राज्य में बिजली उत्पादन में यह गिरावट ग्रामीण और शहरों दोनों क्षेत्रों में आपूर्ति को प्रभावित कर रही है।

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