लखनऊ। राज्य की छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को लीज पर देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने इस फैसले को राज्यहित और जनहित के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप कर टेंडर निरस्त करने की मांग की है।

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फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने 18 फरवरी 2026 को टेंडर जारी कर छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को निजी कंपनियों को 42 साल की लंबी अवधि के लिए सौंपने का प्रस्ताव रखा है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, निजी कंपनियों को 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट के अग्रिम प्रीमियम पर संचालन का अधिकार दिया जाएगा।

किन परियोजनाओं को लीज पर देने का प्रस्ताव

लीज पर प्रस्तावित परियोजनाओं में भोला (2.7 मेगावाट), सलावा (3 मेगावाट), निर्गजनी (5 मेगावाट), चित्तौरा (3 मेगावाट), पलरा (0.6 मेगावाट) और सुमेरा (1.5 मेगावाट) शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थित हैं और करीब 90 से 97 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं।

क्षमता कम दिखाने का आरोप

AIPEF का आरोप है कि इन परियोजनाओं की कुल स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट है, जबकि टेंडर में इसे मात्र 6.3 मेगावाट दर्शाया गया है। फेडरेशन का कहना है कि इस आधार पर लगभग 10 करोड़ रुपये में राज्य की मूल्यवान परिसंपत्तियां निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

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फेडरेशन का यह भी कहना है कि अपर गंगा नहर में वर्ष भर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे इन परियोजनाओं में निरंतर विद्युत उत्पादन संभव है। सीमित निवेश से इनके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण पर खर्च एक वर्ष में ही वसूला जा सकता है।

भूमि के व्यावसायिक उपयोग की आशंका

फेडरेशन ने आशंका जताई है कि 42 वर्षों की लंबी लीज अवधि में निजी कंपनियां न केवल बिजली उत्पादन से लाभ कमाएंगी, बल्कि परियोजनाओं से जुड़ी जमीन का व्यावसायिक उपयोग भी कर सकती हैं। इतनी लंबी अवधि के बाद परिसंपत्तियों की मूल स्थिति में वापसी पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

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AIPEF ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर निजीकरण को बढ़ावा देने और सार्वजनिक संपत्तियों को कम कीमत पर हस्तांतरित करने का आरोप लगाया है। फेडरेशन ने मांग की है कि सरकार इन परियोजनाओं का पुनरुद्धार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण सरकारी क्षेत्र में ही कराए, ताकि राज्य की संपत्तियों और जनहित की रक्षा हो सके।

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