एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । 2 फरवरी के प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, संयुक्त किसान मोर्चा और सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त अभियान को तेज कर दिया है। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पारित कराने का प्रयास किया गया, तो देशभर में बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के लाइटनिंग एक्शन किया जाएगा।

एकजुट होकर व्यापक जन आंदोलन चलाने का निर्णय

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को ऐतिहासिक और निर्णायक बनाने के लिए बिजली कर्मियों, किसानों और श्रमिक संगठनों ने एकजुट होकर व्यापक जन आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। समिति का कहना है कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, श्रमिकों और आम बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा का साझा संघर्ष है।संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय को तत्काल निरस्त किया जाए।

कर्मचारी विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाने में निरंतर योगदान दे रहे

समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों को मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर पूरा विश्वास है और उनके मार्गदर्शन में कर्मचारी विद्युत व्यवस्था को बेहतर बनाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। यदि निजीकरण का फैसला वापस लिया जाता है, तो बिजली कर्मी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ व्यवस्था को और सुदृढ़ करेंगे।

वहीं, संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को संसद में एकतरफा तरीके से पारित कराने की कोशिश की गई, तो देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मी मजबूर होकर लाइटनिंग एक्शन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।

निजीकरण के उद्देश्य से एक के बाद एक नीतिगत प्रस्ताव ला रही

समिति ने बताया कि 12 फरवरी की हड़ताल के दौरान उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा और सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ता भी सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जिससे आंदोलन को व्यापक जन समर्थन मिलेगा।संघर्ष समिति ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से एक के बाद एक नीतिगत प्रस्ताव ला रही है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 435वें दिन भी प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। समिति ने दो टूक कहा कि जब तक निजीकरण के फैसले वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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