लखनऊ । राजधानी Lucknow बुधवार को दर्द, सन्नाटा और आंसुओं में डूबी रही। आशियाना के सेक्टर-एल में रहने वाले मानवेंद्र सिंह (49) का शव जब पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा, तो परिजनों की चीखें आसमान तक गूंज उठीं। जिस आंगन में कभी हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा था।वीआईपी रोड स्थित Baikunth Dham में नम आंखों के बीच अंतिम संस्कार हुआ। कांपते हाथों से भतीजे कृत सिंह ने मुखाग्नि दी। हर चेहरे पर एक ही सवाल था—आखिर ऐसा कैसे हो गया?

नीट की तैयारी से शुरू हुआ विवाद, मौत पर खत्म हुई बात

पुलिस के मुताबिक 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता-पुत्र के बीच नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर कहासुनी हुई। गुस्से के उस एक पल ने सब कुछ छीन लिया। आरोप है कि बेटे अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से गोली चला दी। पिता वहीं ढेर हो गए।डीसीपी मध्य Vikrant Veer के अनुसार, मामले में हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

खून के रिश्ते का भयावह सच

बताया जा रहा है कि घटना के बाद छोटी बहन कृति कमरे से बाहर आई तो पिता का निर्जीव शरीर देखा। वह चीखना चाहती थी, लेकिन उसे चुप करा दिया गया। चार दिनों तक घर के भीतर बंद वह सदमे में रही।
जिस भाई के साथ बचपन बीता, उसी की धमकी ने उसकी आवाज छीन ली। आज भी वह बोल नहीं पा रही है।

दादा की टूटी दुनिया

मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह, जो सेवानिवृत्त दरोगा हैं, जालौन से भागते हुए लखनऊ पहुंचे। बेटे की अर्थी देखकर उनकी आंखें सूख गईं। शायद पुलिस की नौकरी में बहुत कुछ देखा होगा, लेकिन अपने ही घर में ऐसी त्रासदी… यह घाव कभी नहीं भरेगा।यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है। यह उस परिवार की कहानी है, जहां सपनों का बोझ रिश्तों से भारी पड़ गया।

पिता की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई

एक पिता की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई, और बेटा सलाखों के पीछे है। पीछे रह गई है एक मां की सिसकियां, एक बहन की खामोशी और एक दादा की टूटी हुई दुनिया।लखनऊ आज भी स्तब्ध है—क्या एक पल का गुस्सा इतनी बड़ी कीमत मांग सकता है?

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