मथुरा। ब्रज में होली का उत्सव करीब 40 दिनों तक उल्लास के साथ मनाया जाता है। कहीं लाठमार, कहीं लड्डू और कहीं फूलों की होली की धूम रहती है। दाऊजी का हुरंगा और छड़ीमार होली विश्वविख्यात हैं। इसी ब्रज क्षेत्र के मांट इलाके के गांव जाबरा में होली से जुड़ी एक अनूठी और भावनात्मक परंपरा आज भी जीवित है।
यह परंपरा शिवरात्रि से लेकर होली तक जाती है निभाई
जाबरा गांव में जिन परिवारों में वर्षभर के दौरान किसी सदस्य का निधन हो जाता है, उनके घर के बाहर नगाड़े (स्थानीय भाषा में ‘बम्ब’) की थाप पर होली के रसिया गाकर शोक उठाया जाता है। गांव की बोली में इसे ‘त्योहार उठाना’ कहा जाता है। यह परंपरा शिवरात्रि से लेकर होली तक निभाई जाती है।ग्रामीणों के अनुसार, जब किसी परिवार में मृत्यु होती है तो उस घर में त्योहार नहीं मनाया जाता। ऐसे में गांव के बुजुर्ग नगाड़ा बजाकर और होली के रसिया गाकर यह संदेश देते हैं कि जो ईश्वर को मंजूर था, वह हो चुका।
अब पूरा गांव मिलकर प्रेम और भाईचारे के साथ होली मनाए
अब पूरा गांव मिलकर प्रेम और भाईचारे के साथ होली मनाए। इस रस्म के जरिए शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना दी जाती है और उन्हें सामाजिक रूप से फिर से उत्सव में शामिल किया जाता है।गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा पूरे ब्रज क्षेत्र में केवल जाबरा गांव में ही निभाई जाती है। इस वर्ष गांव में करीब 19 लोगों की मृत्यु हुई, जिन सभी के घरों पर नगाड़ा बजाकर शोक उठाया गया।इस आयोजन में गांव के अनेक लोग मौजूद रहे और सामाजिक एकता व परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
