लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में कई अहम मुद्दों पर विचार रखे। यह बैठक लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हिंदू समाज और जनसंख्या पर चिंता

डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना आवश्यक है। उन्होंने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए लालच और जबरन मतांतरण पर रोक लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने ‘घर वापसी’ अभियान को तेज करने और हिंदू धर्म में लौटने वालों की जिम्मेदारी समाज द्वारा उठाने की बात कही।

घुसपैठ पर कड़ा रुख

उन्होंने बढ़ती घुसपैठ को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि घुसपैठियों को “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” करना होगा तथा उन्हें रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए।

परिवार और मातृशक्ति की भूमिका

सरसंघचालक ने कहा कि हिंदू परिवार व्यवस्था का आधार मातृशक्ति है। परंपरागत व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कमाई का अधिकार भले पुरुषों के पास रहा हो, लेकिन खर्च का निर्णय माताएं करती थीं। उन्होंने महिलाओं को ‘अबला’ नहीं बल्कि ‘असुर मर्दिनी’ बताते हुए समाज में उनकी केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।

जाति और सामाजिक समरसता

यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए, और यदि कोई कानून गलत है तो उसे बदलने का संवैधानिक तरीका अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जातियां झगड़े का कारण नहीं बननी चाहिएं। समाज में अपनापन और समन्वय का भाव जरूरी है।उन्होंने कहा, “जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुककर उठाना होगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है।”

अंतरराष्ट्रीय साजिशों पर टिप्पणी

डॉ. भागवत ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग भारत की सद्भावना के खिलाफ योजनाएं बना रहे हैं, इसलिए समाज को सजग रहने की आवश्यकता है।इस बैठक में सिख, बौद्ध, जैन समाज के साथ-साथ रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, आर्ट ऑफ लिविंग, आर्य समाज, संत निरंकारी आश्रम समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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