प्रयागराज/ लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशनों में लगे सीसीटीवी कैमरों में लगातार सामने आ रही खराबियों को गंभीरता से लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इसकी व्यक्तिगत रूप से जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही को “बार-बार का संयोग” मानकर टाला नहीं जा सकता।
गुरुत्वाकर्षण के नियम का पालन करे
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने सीसीटीवी कैमरों की विफलता पर यूपी पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में शीर्ष पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि जवाबदेही भी “गुरुत्वाकर्षण के नियम” का पालन करे, अर्थात यह ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित हो, न कि इसके विपरीत, जहां केवल कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर को बलि का बकरा बनाया जाता है।
बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना संभव नहीं होगा
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव द्वारा की जाने वाली जांच के दौरान जिले में तैनात उच्चतम पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देशों पर भी विचार किया जाए। अदालत ने संकेत दिया कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना संभव नहीं होगा।
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