लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।विधानसभा में अब्बास अंसारी (मऊ सदर) ने अपने क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए भावुक अपील की। बोलने का समय समाप्त होने पर उन्होंने अधिष्ठाता मनोज पांडेय से 30 सेकेंड और देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चार साल में पहली बार बोलने का मौका मिला है और यह भी नहीं पता कि आगे कब मौका मिलेगा। इस पर अधिष्ठाता ने उन्हें आश्वस्त किया कि आगे भी अवसर मिलेगा।
माघ मेले पर सियासी संग्राम
विधान परिषद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से तहसीलदार स्तर के अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र मांगा गया और उन्हें स्नान से रोका गया। सपा के मुकुल यादव ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि वे नौ दिन धरने पर रहे, लेकिन कोई अधिकारी मिलने नहीं गया।वहीं भाजपा के ऋषिपाल सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य को स्नान से नहीं रोका गया, बल्कि 2015 में सपा सरकार के दौरान उन्हीं पर लाठीचार्ज हुआ था। उन्होंने विपक्ष पर “सनातनी बनने” का तंज भी कसा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पीडीए पर बहस
भाजपा की डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने प्रदेश में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का दावा किया, जबकि सपा के मानसिंह यादव ने 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरा।पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को लेकर भी तीखी बयानबाजी हुई। मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सरकार को पिछड़ों की असली हितैषी बताया, तो भाजपा के राम गोपाल ने सपा के पीडीए को “परमानेंट डिवीजन एसोसिएशन” करार दिया।
सफाई मॉडल पर सरकार का दावा
नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ और प्रयागराज में कूड़े के पहाड़ हटाकर विकसित किए गए स्थलों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष के 70 साल के कूड़े को सरकार साफ कर रही है। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ और आगरा जैसे शहर देश के टॉप टेन स्वच्छ शहरों में शामिल हुए हैं।सदन की कार्यवाही के दौरान तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और भावनात्मक अपीलों ने पूरे दिन सियासी तापमान ऊंचा बनाए रखा।
