लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के आशियाना इलाके से ऐसी वारदात सामने आई जिसने रिश्तों, विश्वास और परिवार की परिभाषा को झकझोर कर रख दिया। एक बेटे ने अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने शव के टुकड़े कर उन्हें ठिकाने लगाने की कोशिश की और चार दिन तक उसी घर में सामान्य जिंदगी का दिखावा करता रहा।
बहस से शुरू हुई मौत की कहानी
बताया जा रहा है कि 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) पर नीट परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। अक्षत बीबीए का छात्र था, लेकिन पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बने।20 फरवरी की सुबह पिता-पुत्र के बीच इसी बात को लेकर तीखी बहस हुई। गुस्से में हालात इतने बिगड़े कि लाइसेंसी राइफल से चली गोली ने पिता की जान ले ली। घर की दीवारों के भीतर गूंजती वह आवाज एक परिवार के बिखरने की शुरुआत थी।
बहन की आंखों के सामने टूटा परिवार
गोली की आवाज सुनकर छोटी बहन कृति कमरे में पहुंची। फर्श पर खून से लथपथ पिता का शव पड़ा था। वह चीख पड़ी, लेकिन भाई ने जान से मारने की धमकी देकर उसे चुप करा दिया।बताया जाता है कि चार दिनों तक वह दहशत में उसी घर में बंद रही—जहां एक ओर पिता का निर्जीव शरीर था और दूसरी ओर भाई का खौफ।
हैवानियत की हद
हत्या के बाद आरोपी ने जो किया, उसने इस वारदात को और भी दिल दहला देने वाला बना दिया। पहले शव को कार से ले जाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर आरी खरीदकर शव के टुकड़े कर दिए। हाथ-पैर अलग कर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए गए, जबकि सिर सहित धड़ घर में रखे नीले ड्रम में छिपा दिया गया।पड़ोसियों से कहा गया कि पिता दिल्ली गए हैं। शक से बचने के लिए गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी गई। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की पूछताछ ने चार दिन बाद सच्चाई उजागर कर दी।
सवाल जो चुभते रहेंगे
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस खामोशी की भी कहानी है जो कई घरों में पनपती है। सपनों का दबाव, संवाद की कमी और पल भर का गुस्सा—इन सबने मिलकर एक परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।आज एक पिता नहीं रहा, एक बेटा सलाखों के पीछे है, और एक बेटी की आंखों में वह मंजर हमेशा के लिए कैद हो गया है।यह कहानी सिर्फ सनसनी नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है—रिश्तों में संवाद खत्म हो जाए तो घर की दीवारें भी गवाही देने लगती हैं।
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