लखनऊ । उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के सम्मेलन में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से मांग की गई कि किसानों और आम उपभोक्ताओं के हित में निजीकरण की चल रही प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए।

सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रदेश में जारी निजीकरण प्रक्रिया पर विस्तार से अपनी बात रखी।उन्होंने कहा कि यह बिल ऊर्जा क्षेत्र के व्यापक निजीकरण का दस्तावेज है, जिसका सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बिल में सब्सिडी समाप्त करने और बिजली की पूरी लागत उपभोक्ताओं से वसूलने का प्रावधान है।

बिजली की औसत लागत करीब 8.18 रुपये प्रति यूनिट

शैलेन्द्र दुबे के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बिजली की औसत लागत करीब 8.18 रुपये प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद निजी कंपनियों को न्यूनतम 16 प्रतिशत मुनाफे की गारंटी मिलने से दरें बढ़कर कम से कम 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच सकती हैं।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई किसान 10 हॉर्स पावर का पंप प्रतिदिन 10 घंटे चलाता है, तो लगभग 2250 यूनिट मासिक खपत पर उसे करीब 22,500 रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है। उनका दावा है कि इसका सबसे बड़ा आर्थिक बोझ किसानों पर पड़ेगा।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के विरोध में भी प्रस्ताव पारित

सम्मेलन को संबोधित करते हुए ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने स्पष्ट घोषणा की कि बिजली निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में प्रदेश के किसान पूरी मजबूती से बिजली कर्मियों के साथ खड़े हैं।सम्मेलन में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के विरोध में भी प्रस्ताव पारित किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर निजीकरण और फ्रेंचाइजीकरण को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में वर्टिकल सिस्टम लागू करने से बिजली व्यवस्था प्रभावित होने का भी आरोप लगाया गया।

आंदोलन अब 454 दिन पूरे कर चुका

इस मौके पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के पूर्व अध्यक्ष वी.पी. सिंह को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के विद्युत प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया।उल्लेखनीय है कि बिजली निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन अब 454 दिन पूरे कर चुका है। इस अवसर पर प्रदेशभर के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिलती दिख रही है।

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