लखनऊ । ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप पर कड़ी आपत्ति जताई है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों और इंजीनियरों को शामिल किए बिना वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के आधार पर बिल संसद में पेश किया गया, तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
फेडरेशन ने इस बात पर जताई अापत्ति
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 30 जनवरी 2026 को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर 14 दिनों की समयसीमा के साथ वर्किंग ग्रुप का गठन किया। उनका कहना है कि इतने व्यापक प्रभाव वाले विधेयक के लिए यह समयसीमा बेहद कम है और जल्दबाजी को दर्शाती है।फेडरेशन ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि वर्किंग ग्रुप में ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल को शामिल किया गया है, जो सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है। फेडरेशन का आरोप है कि इस संस्था के कई पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से वितरण क्षेत्र के निजीकरण का समर्थन करते रहे हैं।
बिल पेश किया गया तो होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन
साथ ही, आशीष गोयल का नाम लेते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष के रूप में वे पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं।फेडरेशन ने मांग की है कि जब एक निजी संस्था को वर्किंग ग्रुप में स्थान दिया गया है, तो बिजली क्षेत्र के राष्ट्रीय स्तर के कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों को भी समान प्रतिनिधित्व दिया जाए। उनका कहना है कि देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करेंगे।फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारियों की चिंताओं की अनदेखी कर बिल को संसद के बजट सत्र में पेश किया गया, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
