लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों की लखनऊ में आयोजित बैठक में बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों और आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लिया गया। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही दमनात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली गईं और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद नहीं हुई, तो मार्च और अप्रैल में प्रदेशभर में चरणबद्ध एवं व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

परियोजना मुख्यालयों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे

बैठक में निर्णय लिया गया कि मार्च माह में सभी क्षेत्रीय एवं परियोजना मुख्यालयों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद अप्रैल में राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित कर आंदोलन की अगली रणनीति की घोषणा की जाएगी।संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने स्मार्ट मीटर न लगवाने वाले कर्मियों की बिजली काटने के निर्देश दिए हैं या अवैध रूप से विद्युत आपूर्ति बाधित की है, उनके खिलाफ आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के उद्देश्य से अवैधानिक रूप से काट दी गई

समिति ने आरोप लगाया कि 20 फरवरी को लखनऊ के प्राग नारायण मार्ग स्थित हाइडिल कॉलोनी की बिजली आपूर्ति जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के उद्देश्य से अवैधानिक रूप से काट दी गई, जिससे कर्मचारियों के परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।समिति ने याद दिलाया कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद ऊर्जा मंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन को सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है।

निजीकरण विरोधी आंदोलन के 456 दिन पूरे

संघर्ष समिति के अनुसार, निजीकरण के विरोध में पिछले 15 महीनों से चल रहे आंदोलन के दौरान संविदा कर्मियों को सेवा से हटाना, बड़े पैमाने पर तबादले करना और फेसियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोकना जैसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।निजीकरण विरोधी आंदोलन के 456 दिन पूरे होने पर संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन कर दमनात्मक नीतियां समाप्त करने की मांग उठाई।

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