मथुरा। जब मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति का संकल्प हो तो शारीरिक सीमाएं भी आस्था के आगे झुक जाती हैं। इसका जीवंत उदाहरण हैं मथुरा की तहसील महावन के गांव आंगई दाऊजी निवासी दिव्यांग शिवभक्त धीरेंद्र सिकरवार। जन्म से ही दोनों पैर न होने के बावजूद धीरेंद्र राजघाट से मथुरा तक कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। गले में गंगाजल की दो कट्टियां लटकाए जब वह सड़क पर बढ़ते हैं तो हर कोई उनके जज्बे को नमन करता है।
बल्देव पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल तक पढ़ाई की
किसान सत्यवीर सिंह के चार बेटों और एक बेटी में दूसरे नंबर के धीरेंद्र ने बल्देव पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल तक पढ़ाई की। दिव्यांग होने के बावजूद वह घर से पांच किलोमीटर दूर बस से स्कूल जाया करते थे। परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया।इस बार भी वह बिना किसी सहारे के अकेले कांवड़ लेने निकले हैं। अविवाहित धीरेंद्र बस से रामघाट पहुंचे, वहां स्नान कर बुधवार को यात्रा शुरू की और गुरुवार को अतरौली तक पहुंच गए। वह प्रतिदिन लगभग 20 से 24 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं। रास्ते में जहां भी मंदिर मिलता है, वहीं कांवड़ टांगकर विश्राम करते हैं और जो भी हल्का भोजन मिल जाता है, उसी से गुजारा करते हैं।
इस बार चार लीटर जल लेकर चल रहे
धीरेंद्र बताते हैं कि पिछले वर्ष वह दो लीटर गंगाजल लेकर गए थे, लेकिन इस बार चार लीटर जल लेकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान के प्रति उनकी आस्था ही उनकी ताकत है। परिवार के सदस्य भी इस संकल्प में उनका पूरा सहयोग करते हैं।समाजसेवी मंगल गुप्ता, भुवेंद्र उपाध्याय और दुष्यंत का कहना है कि धीरेंद्र जैसे भक्तों का जज्बा समाज के लिए प्रेरणा है। उनकी भक्ति और हौसले को देखकर हर कोई भावुक और प्रेरित हो रहा है।
