लिवर ठीक करने के नाम पर ज़हर बेच रहे थे ठग, 50 हजार नकली गोलियां बरामद, कॉर्पोरेट स्टाइल में चलता था धंधा
गाजियाबाद। गाजियाबाद में इंसानी सेहत से खिलवाड़ करने वाला एक खतरनाक खेल बेनकाब हुआ है। थाना मुरादनगर पुलिस ने एक नामी कंपनी की लिवर की दवा की नकली खेप पकड़कर ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो मरीजों को दवा नहीं बल्कि मौत परोस रहा था। पुलिस ने मौके से करीब 50 हजार नकली टैबलेट, दवाइयों के रैपर, ढक्कन और डिब्बियां बरामद की हैं। यह जहरीली दवा कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी और पूरा कारोबार कॉर्पोरेट तरीके से चलाया जा रहा था।
दुकानदारों को भी नहीं हुआ शक
गिरोह की चाल इतनी शातिर थी कि मेडिकल स्टोर संचालकों को भी भनक नहीं लगती थी। नकली दवा के साथ फर्जी लेकिन असली जैसे बिल दिए जाते थे, ताकि कोई शक न करे। यही वजह रही कि यह नकली दवा आराम से बाजार में खपाई जा रही थी।
पांच आरोपी गिरफ्तार, 8वीं पास से मेडिकल लाइन तक का नेटवर्क
पुलिस ने इस मामले में मयंक अग्रवाल, अनुज गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इस गिरोह में दवा का होलसेल कारोबारी, रेडियोलॉजी की पढ़ाई कर रहा छात्र, इलेक्ट्रीशियन, और मेडिकल स्टोर संचालक तक शामिल थे। यानी पढ़े-लिखे से लेकर आठवीं पास तक, सब मिलकर इस खतरनाक खेल को अंजाम दे रहे थे।
हरियाणा से बनती थी नकली दवा, कई राज्यों में सप्लाई
मुख्य आरोपी मयंक अग्रवाल को पता था कि बाजार में एक निजी कंपनी की लिवर 52 दवा की जबरदस्त मांग है। इसी लालच में उसने हरियाणा के सोनीपत से नकली दवा बनवानी शुरू की और उसे यूपी समेत कई राज्यों में सप्लाई कराया।
कार से होती थी सप्लाई, पुलिस ने पूरा जखीरा पकड़ा
पुलिस ने आरोपियों के पास से
500 रैपर सीट
1200 ढक्कन
1200 प्लास्टिक डिब्बियां
50 हजार नकली टैबलेट
और एक वैगनआर कार
बरामद की है।
सेहत से खिलवाड़, जांच तेज
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली दवाइयां किन-किन जिलों और राज्यों में सप्लाई की गईं और अब तक कितने मरीज इसकी चपेट में आए। स्वास्थ्य विभाग को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। यह मामला सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों की जान से खेलने का है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
