लखनऊ। यूपी की राजधानी के आशियाना सेक्टर-एल में सामने आया मानवेंद्र सिंह हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक मां की मौत के बाद बिखरते परिवार की दर्दनाक कहानी भी है। इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में वर्ष 2017 की वह त्रासदी बताई जा रही है, जब अक्षत की मां ने पारिवारिक कलह के चलते जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी।
मां की मौत ने घर की नींव हिला दी थी
परिवार के करीबी बताते हैं कि मां की मौत ने घर की नींव हिला दी थी। उस दिन के बाद से बेटा अक्षत भीतर ही भीतर टूट गया था। वह अपनी मां की मौत के लिए पिता को जिम्मेदार मानने लगा। मां के जाने के बाद घर में जो खालीपन आया, वह कभी भर नहीं सका। एक तरफ पिता अपने ढंग से जिंदगी संभालने की कोशिश करते रहे, दूसरी तरफ बेटा चुपचाप भीतर ही भीतर आक्रोश पालता रहा।
मां बच्चों और पिता के बीच सेतु का काम करती थीं
बताया जाता है कि मां के रहते परिवार में संतुलन बना हुआ था। वही बच्चों और पिता के बीच सेतु का काम करती थीं। उनके जाने के बाद संवाद कम होता गया और गलतफहमियां बढ़ती गईं। अक्षत डॉक्टर नहीं बनना चाहता था, लेकिन पिता उस पर नीट परीक्षा पास करने का दबाव डाल रहे थे। मां होतीं तो शायद बेटे की मनःस्थिति को समझ पातीं, लेकिन उनके अभाव में हर बात टकराव में बदलती चली गई।
मां की मौत के बाद अक्षत का स्वभाव बदल गया था
करीबियों के अनुसार, मां की मौत के बाद अक्षत का स्वभाव बदल गया था। वह पहले से ज्यादा चिड़चिड़ा और अलग-थलग रहने लगा। तीन साल पहले वह घर छोड़कर भी चला गया था और एक भावुक नोट लिखकर गया था, जिसमें उसने खुद को पिता की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने वाला बताया था। यह नोट उसके भीतर के दबाव और टूटन की झलक देता है।
पिता-पुत्र के बीच नीट परीक्षा को लेकर विवाद हुआ
20 फरवरी की सुबह जो कुछ हुआ, वह इसी लंबे मानसिक संघर्ष का भयावह परिणाम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, पिता-पुत्र के बीच नीट परीक्षा को लेकर विवाद हुआ और गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। घटना के बाद जो अमानवीय कृत्य हुआ—शव के टुकड़े करना और उसे छिपाने की कोशिश—वह इस बात का संकेत है कि रिश्तों में कितनी गहरी दरार पड़ चुकी थी।
मां के जाने से जो खालीपन पैदा हुआ नफरत
डीसीपी मध्य Vikrant Veer के मुताबिक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।यह पूरा घटनाक्रम एक मां की अनुपस्थिति से उपजे भावनात्मक शून्य को उजागर करता है। अगर परिवार में समय रहते संवाद और समझ बनी रहती, तो शायद यह घर आज भी बसा होता। मां के जाने से जो खालीपन पैदा हुआ, वह अंततः एक पूरे परिवार के विनाश का कारण बन गया।
