लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हो रहे गुणात्मक सुधार और रिकॉर्ड विद्युत आपूर्ति के सरकारी दावों के बाद निजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने कहा है कि जब सरकार स्वयं यह स्वीकार कर चुकी है कि उत्तर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है और रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, तो ऐसे समय में निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए।

प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर विद्युत आपूर्ति की गई

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन के मनमाने और अव्यावहारिक निर्णयों से सुचारु रूप से चल रही विद्युत व्यवस्था पटरी से उतर सकती है। समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि सरकारी वक्तव्यों में यह स्पष्ट किया गया है कि विगत वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर विद्युत आपूर्ति की गई और पीक आवर के दौरान भी मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध कराई गई।सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए समिति ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 1,64,786 लाख यूनिट विद्युत आपूर्ति कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। इसके साथ ही आरडीएसएस योजना के तहत किए गए अरबों रुपये के निवेश के बाद सरकारी वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा चुका

संघर्ष समिति का कहना है कि जब भारी निवेश के बाद बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा चुका है, तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया जारी रखना प्रदेश के हित में नहीं है।संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने आरोप लगाया कि निजीकरण की तैयारी के नाम पर पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे कार्यस्थलों का वातावरण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ सहित कई शहरों में वर्टिकल पुनर्गठन के नाम पर नियमित और संविदा पदों को समाप्त किया जा रहा है, जिसका सीधा असर विद्युत व्यवस्था पर पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास

समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास है। यदि निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाता है, तो प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।संघर्ष समिति ने प्रबंधन को चेतावनी दी कि पावर सेक्टर में मनमाने प्रयोगों से बचा जाए और निजीकरण का फैसला वापस लेकर कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार कार्यक्रम चलाए जाएं। जब तक निजीकरण निरस्त नहीं किया जाता और कर्मचारियों पर की जा रही दमनात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं ली जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *