एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । यूपी एसटीएफ ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 334 संरक्षित देशी तोतों की खेप के साथ एक शातिर तस्कर को गिरफ्तार किया है। यह सनसनीखेज कार्रवाई वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर की गई, जहां ट्रेन पकड़ने से पहले तस्कर को दबोच लिया गया। सात प्लास्टिक बैगों में भरे तोतों की हालत देख मौके पर मौजूद लोग भी सन्न रह गए।

तस्कर की पहचान, बंगाल का रहने वाला निकला आरोपी

एसटीएफ को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि यूपी से प्रतिबंधित पक्षियों की खेप ट्रेन के जरिए पश्चिम बंगाल भेजी जा रही है। जैसे ही तस्कर प्लेटफार्म पर संदिग्ध बैगों के साथ दिखा, एसटीएफ टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बैग खोलते ही 334 जीवित तोते निकल आए।गिरफ्तार तस्कर ने पूछताछ में अपना नाम मोहम्मद जाहिद बताया, जो थाना सदर बर्धमान, जिला पश्चिम बंगाल का निवासी है। उसके पास से 3,700 रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।

150 रुपये में खरीद, 2000 में बिक्री – करोड़ों के खेल का खुलासा

पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह यूपी के फतेहपुर और प्रतापगढ़ जिलों से करन नाम के तस्कर से तोतों की खेप खरीदता था। यहां प्रति तोता 150 से 200 रुपये में लिया जाता था और पश्चिम बंगाल पहुंचते ही इन्हें 1500 से 2000 रुपये में बेचा जाता था। एसटीएफ का मानना है कि यह सिर्फ एक खेप है, इससे पहले भी कई खेप बंगाल भेजी जा चुकी हैं।

नेटवर्क खंगालने में जुटी एसटीएफ

बरामद सभी तोते वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित हैं। इस तरह की तस्करी न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है।एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक सत्यसेन यादव ने बताया कि आरोपी से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। यूपी से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है।

सवाल यह है

  • यूपी से कितनी बार भेजी गईं ऐसी खेपें?
  • कौन हैं पर्दे के पीछे के बड़े खिलाड़ी?
  • रेलवे के जरिए वन्यजीव तस्करी कैसे चल रही थी?

एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद वन्यजीव तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।

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