एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । इको गार्डन: उत्तर प्रदेश के राशन कोटेदारों का 28 जनवरी 2026 से शुरू हुआ धरना पहले दिन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। जौनपुर, गाजीपुर और मुरादाबाद मंडलों के सैकड़ों कोटेदार प्रतिनिधि सुबह से धरना स्थल पर पहुंचे और पारंपरिक नारे लगाकर अपनी मांगों पर जोर दिया। किसी भी प्रकार के यातायात जाम या पुलिस संघर्ष की खबर नहीं आई, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली।
कोटेदारों की प्रमुख मांगें
प्रदेश के लगभग 80,000 कोटेदार परिवार 2017 से कमीशन दरों में बदलाव न होने के कारण परेशान हैं। महंगाई के इस दौर में 90 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गुजारा मुश्किल हो गया है। उनके संगठन ने रोस्टर सिस्टम अपनाकर हर मंडल को बारी-बारी से धरना में शामिल किया, जिससे आंदोलन लगातार गति में है।
कमीशन वृद्धि: 90 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति क्विंटल, या मासिक न्यूनतम मानदेय 30,000 रुपये।
डिजिटल कार्यों का भत्ता: आधार वेरिफिकेशन, POS मशीन संचालन और स्टॉक एंट्री जैसी जिम्मेदारियों के लिए अलग भुगतान।
पारदर्शिता पुरस्कार: ईमानदार वितरण करने वालों को प्रोत्साहन राशि और बीमा कवरेज।
हरियाणा में 250 रुपये और पंजाब में 280 रुपये प्रति क्विंटल मिलते हैं, जबकि यूपी में सबसे कम दरें हैं। कोटेदारों का कहना है कि गरीबों की थाली भरने का काम करने वाले उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।
रोस्टर शेड्यूल: 17 मंडलों का क्रमबद्ध सहयोग
28 जनवरी: जौनपुर, गाजीपुर, मुरादाबाद
29 जनवरी: प्रयागराज, आगरा
30 जनवरी: लखनऊ, सहारनपुर
31 जनवरी: वाराणसी, चंदौली, विंध्याचल
1-4 फरवरी: गोरखपुर, मेरठ, आजमगढ़, बरेली, चित्रकूट, अयोध्या
धरने के 10 दिन पूरे होने के बाद विधानसभा घेराव और राशन वितरण बहिष्कार की योजना है। प्रमुख संगठन जैसे उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद और ऑल इंडिया फेयर प्राइस डीलर फेडरेशन इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली घटनाएं
यह आंदोलन नया नहीं है। नवंबर 2024 में इको गार्डन धरना और दिसंबर 2025 में जवाहर भवन घेराव हुए। सीएमओ स्तर पर बुलावे आए, लेकिन ठोस निर्णय नहीं हुआ। पिछले प्रदर्शनों से सीख लेकर इस बार आंदोलन अधिक संगठित रणनीति के साथ चल रहा है।
सकारात्मक संकेत और भविष्य की अपेक्षाएं
कोटेदारों ने अपील की कि सरकार फीडबैक प्रक्रिया तेज करे, ताकि लाखों परिवार प्रभावित न हों। राशन बहिष्कार की धमकी फिलहाल टाली गई है। आंदोलन न केवल कोटेदारों के हक के लिए, बल्कि PDS सिस्टम को अधिक निष्पक्ष और कुशल बनाने का अवसर भी प्रदान करता है। उक्त जानकारी मुस्तकीम मलिक मिडिया प्रभारी, उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद, सहारनपुर ने दी।
