एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य में 325 किलोमीटर लंबे डिफेंस कॉरिडोर सर्किट में अब उन्नाव को सातवें नोड के रूप में शामिल किया गया है। उन्नाव में लगभग 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

15 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना

झांसी, कानपुर, लखनऊ और अब उन्नाव को जोड़कर यह कॉरिडोर देश का सबसे लंबा और रणनीतिक रक्षा औद्योगिक क्लस्टर बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्नाव में 230 हेक्टेयर भूमि पर हथियार, गोला-बारूद, ड्रोन, मशीन गन, बुलेट और बुलेटप्रूफ जैकेट जैसी रक्षा सामग्री के निर्माण की सुविधा विकसित की जा रही है।सरकार के अनुसार, सिर्फ इस नोड से ही करीब 15 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। रणनीतिक दृष्टि से उन्नाव का चयन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कानपुर-लखनऊ हाईवे, निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से बेहद नजदीक स्थित है।

अब तक 62 से अधिक कंपनियों को भूमि आवंटन

झांसी, कानपुर, लखनऊ और उन्नाव नोड्स में अब तक 62 से अधिक कंपनियों को भूमि आवंटन किया जा चुका है। झांसी नोड में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव हैं, कानपुर नोड में गोला-बारूद और अंतरिक्ष उपकरण निर्माण के उद्योग विकसित हो रहे हैं, जबकि लखनऊ नोड में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट और उच्च तकनीक रक्षा इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इस कॉरिडोर से उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन और उच्च तकनीक उद्योगों का मजबूत इकोसिस्टम विकसित होगा और राज्य को राष्ट्रीय रक्षा हब के रूप में स्थापित किया जाएगा।

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