एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राज्य कैबिनेट ने गुरुवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की, जो प्रशासनिक, न्यायिक, शहरी विकास और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों में अहम बदलाव लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 32 प्रस्तावों में से 30 को मंजूरी दी गई। इनमें पीसीएस न्यायिक सेवा की भर्ती नियमों में बदलाव, सीएम फेलो के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष छूट, पुराने और बंद पड़े भवनों पर अपार्टमेंट निर्माण की नीति और शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसी अहम योजनाएं शामिल हैं।
पीसीएस न्यायिक भर्ती में तीन साल का वकालत अनुभव अनिवार्य
कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि पीसीएस (न्यायिक) सेवा की सीधी भर्ती के लिए तीन साल का विधिक व्यवसाय या वकालत का अनुभव अनिवार्य होगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई।पहले पीसीएस न्यायिक सेवा में भर्ती के लिए केवल विधि स्नातक (एलएलबी) होना पर्याप्त था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षाओं में तीन साल के अनुभव को अनिवार्य ठहराया था और सभी हाईकोर्ट तथा राज्य सरकारों से इसे लागू करने का निर्देश दिया था। इसी आधार पर राज्य सरकार ने यह संशोधन किया।
पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया
नियमावली में प्रशिक्षण और पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, मजबूत और सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है। सरकार का कहना है कि नए नियमों से न्यायिक सेवा में चयन और उन्नति की प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट होगी और यह युवाओं के लिए रोजगार और करियर की संभावनाओं को मजबूत करेगा।
सीएम फेलो को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु छूट
कैबिनेट ने यह भी फैसला किया कि प्रदेश में तैनात सीएम फेलो को राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट और अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षाओं पर लागू होगा।नियमावली के अनुसार, सीएम फेलो के रूप में एक, दो या तीन वर्ष कार्य कर चुके युवाओं को क्रमश: एक, दो और तीन साल की आयु छूट दी जाएगी। कार्यकाल की गणना विज्ञापन वर्ष के जुलाई के प्रथम दिवस से की जाएगी।
अतिरिक्त अंक भी कार्यकाल के आधार पर दिए जाएंगे। उदाहरण के लिए:
100 अंक वाले पेपर में एक वर्ष कार्य करने वालों को 1 अंक, दो वर्ष वालों को 2 अंक और तीन वर्ष पूरे करने वालों को 3 अंक।
101 से 500 अंक वाले पेपर में क्रमश: 1.5, 3 और 4.5 अंक।
501 से 1000 अंक वाले पेपर में क्रमश: 2, 4 और 6 अंक।
1000+ अंक वाले पेपर में क्रमश: 2.5, 5 और 7.5 अंक।
सरकार ने यह सुविधा इसलिए दी है क्योंकि सीएम फेलो युवाओं की मदद से योजनाओं का क्रियान्वयन और निगरानी आसान होती है।
पुराने और बंद पड़े भवनों पर अपार्टमेंट बनाने की नीति
उत्तर प्रदेश में 25 साल पुराने भवन और तीन साल से बंद पड़े औद्योगिक भवनों को ध्वस्त करके उसके स्थान पर अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 को मंजूरी दी।इस नीति के अनुसार, नए अपार्टमेंट के नक्शे पर विकास शुल्क में 50% और हाउसिंग सोसायटी में 25% छूट दी जाएगी। नीति का लाभ निजी और सरकारी कॉलोनियों दोनों को मिलेगा।एकल आवासीय या एकल भवन इस नीति में शामिल नहीं होंगे।
लीज पर आवंटित भूमि और सरकारी भूमि जहां फ्री-होल्ड परिवर्तन नहीं हुआ है, वे भी बाहर रहेंगे।
नीति के तहत तीन साल से बंद उद्योगों और घोषित रुग्ण इकाइयों को तोड़कर पुनर्निर्माण की अनुमति होगी।
निर्माण कार्य को तीन साल में पूरा करना होगा, अधिकतम दो साल का विस्तार दिया जा सकेगा।
ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के 10% मकान बनाने पर शेल्टर फीस में छूट मिलेगी।
विकास प्राधिकरण इस योजना को सीधे या पीपीपी मोड और निजी बिल्डरों के माध्यम से कर सकेंगे। हाउसिंग सोसाइटी या रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी भी इस योजना में भाग ले सकती है, जिसमें दो तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी।
शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मंजूरी दी।
इसका लाभ 11.92 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा।
इसे आयुष्मान योजना के माध्यम से लागू किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के 2.97 लाख कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।
योजना पर कुल खर्च लगभग 358.61 करोड़ रुपये आएगा, जबकि माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर 89.25 करोड़ रुपये का व्यय भार होगा।
यह सुविधा पूरी तरह कैशलेस है और कर्मचारियों को अस्पताल में सीधे लाभ मिलेगा। पहले से किसी सरकारी योजना से आच्छादित कर्मचारियों को लाभ नहीं दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पिछले साल शिक्षक दिवस पर इस योजना की घोषणा की थी और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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