एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों को अब अपने मूल विद्यालय या घर के पास के स्कूल में तैनाती का विकल्प मिलेगा। इस प्रक्रिया को जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति जिला स्तर पर पूरी करेगी और आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कराएगी।

जिलाधिकारियों को इसके लिए निर्देश भेज दिए

बेसिक शिक्षा निदेशालय ने जिलाधिकारियों को इसके लिए निर्देश भेज दिए हैं। दिसंबर में शासनादेश और बीएसए को भी निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन तब जिलों में इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब दिए गए निर्देशों के अनुसार, शिक्षामित्रों को पहले उनके मूल विद्यालय में तैनात किया जाएगा।

महिला शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान

महिला शिक्षकों को उनकी ससुराल के नजदीकी विद्यालय में तैनाती का विकल्प भी दिया जाएगा, ताकि उन्हें दूरस्थ स्थान पर जाने की जरूरत न पड़े। यह कदम महिला शिक्षकों के लिए सुविधाजनक और परिवार-सुलभ कार्यस्थल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

पिछली तैनाती और वर्तमान स्थिति

प्रदेश में लगभग 1.37 लाख शिक्षामित्रों को 2018 में उनके मूल विद्यालय में आने का अवसर मिला था। उस समय बड़ी संख्या में शिक्षामित्र अपने मूल विद्यालय लौट आए थे। वर्तमान में लगभग 35 हजार शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिन्हें मूल या नजदीकी विद्यालय में तैनात किया जाना है।

शिक्षामित्रों में संतोष और आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद

बेसिक शिक्षा निदेशालय का कहना है कि यह तैनाती नीति न केवल शिक्षकों की सुविधा को ध्यान में रखती है, बल्कि विद्यालयों में शिक्षक-अवस्थान संतुलन और शिक्षा गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करेगी। जिलों में बनाई गई समिति शिक्षामित्रों की सूची, उनके मूल और नजदीकी विद्यालयों के आधार पर तैनाती की औपचारिकताएँ पूरी करेगी।इस पहल से प्रदेश के शिक्षामित्रों में संतोष और आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

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