प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों में आरोपियों के पैरों में गोली मारने की बढ़ती घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी को दंडित करने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। हाईकोर्ट ने इस प्रवृत्ति को कानून के शासन (Rule of Law) और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।यह टिप्पणी जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने राजू उर्फ राजकुमार की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने राजू को सशर्त जमानत भी मंजूर कर दी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: पुलिस को सजा देने का अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और इसे संविधान के अनुसार चलाना होगा, जिसमें विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका तय है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को हाथ-पैर जैसे अंगों पर भी गैरजरूरी तरीके से गोली मारने की अनुमति नहीं दी जा सकती।हाईकोर्ट ने कहा—“कानून की नजरों में ऐसे कृत्यों की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस अधिकारियों को गैरजरूरी तरीके से हाथ और पैर जैसे अंगों पर गोली मारने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
छोटे अपराधों में भी ‘मुठभेड़’ दिखाकर पैर में गोली- कोर्ट को संदेह
पीठ ने चिंता जताई कि हाल के दिनों में चोरी, लूट जैसे छोटे अपराधों में भी पुलिस द्वारा मुठभेड़ दिखाकर आरोपियों के पैरों में गोली मारने के मामले बढ़ रहे हैं।मौजूदा केस में कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे संदेह पैदा होता है कि मुठभेड़ की परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला
याची की ओर से वकील कुसुम मिश्रा ने दलील दी कि राजू को झूठे मामले में फंसाया गया और कथित मुठभेड़ में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्णा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तलब कर जवाब मांगा था।दोनों अधिकारी शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए और कोर्ट को आश्वस्त किया कि मुठभेड़ मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए सर्कुलर जारी किए गए हैं। साथ ही कहा कि उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।
मुठभेड़ में मौत/गंभीर चोट पर तत्काल FIR— हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुठभेड़ में मौत या गंभीर चोट होने की स्थिति में—हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जैसे—CBCID, या किसी अन्य थाने की टीम घायल व्यक्ति का बयान मजिस्ट्रेट या मेडिकल अधिकारी के समक्ष अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों को इनाम/पदोन्नति नहीं दी जाएगी।निर्देशों के उल्लंघन पर मुठभेड़ करने वाली टीम के साथ-साथ संबंधित जिले के एसपी/एसएसपी/पुलिस कमिश्नर भी सीधे तौर पर अवमानना के जिम्मेदार होंगे।
अधिकारियों ने कोर्ट को दिया आश्वासन
सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) और डीजीपी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
