नई दिल्ली/बलूचिस्तान। पाकिस्तान के बलूचिस्तान से निर्वासित प्रमुख बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस पत्र में मीर यार बलोच ने न केवल भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों को रेखांकित किया, बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व और उसकी नीतियों पर सीधा हमला बोला है।
भारत और बलूचिस्तान के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं
मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान के छह करोड़ नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और बलूचिस्तान के संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिंगलाज माता मंदिर जैसी आस्था की धरोहरें दोनों क्षेत्रों के साझा इतिहास का जीवंत प्रमाण हैं।
पाकिस्तान पिछले 69 वर्षों से बलूच जनता पर हिंसा थोप रहा
खुले पत्र में बलोच नेता ने बेहद तीखे शब्दों में लिखा कि पाकिस्तान पिछले 69 वर्षों से बलूच जनता पर दमन, अत्याचार और हिंसा थोप रहा है। उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान का हर नागरिक इस लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है और अब समय आ गया है कि इस “कृत्रिम व्यवस्था” को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खुलकर सराहना की
मीर यार बलोच ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सख्त कार्रवाई और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खुलकर सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को साहसी और निर्णायक बताते हुए कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जो रुख अपनाया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए एक संदेश है।
चीन‑पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर भी गंभीर चेतावनी
पत्र में चीन‑पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी गई है। मीर यार बलोच ने आशंका जताई कि यदि बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को जल्द समर्थन नहीं मिला तो चीन अपने सैनिकों को वहां तैनात कर सकता है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में चीनी सैन्य मौजूदगी न सिर्फ क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ेगी, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी भविष्य में बड़ा खतरा बन सकती है।खुले पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने भारत से अपील की कि वह बलूचिस्तान के संघर्ष को केवल एक आंतरिक मुद्दा न समझे, बल्कि इसे मानवाधिकार, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल माने।
