एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में विकास, कल्याण और शहरी सुधार से जुड़े अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 20 प्रस्तावों में से 19 को मंजूरी दी गई। इनमें दिव्यांगजन कल्याण और शहरी पेयजल आपूर्ति सुधार प्राथमिकता में रहे।
18 मंडलों में स्थापित होंगे नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट ने राज्य के सभी 18 मंडलों में नए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (DDRC) खोलने को मंजूरी दी है।वर्तमान में प्रदेश के 38 जिलों में ऐसे केंद्र संचालित हैं, लेकिन कई जगह संसाधन और संचालन से जुड़ी दिक्कतें सामने आ रही थीं। अब सरकार प्रदेशभर में दिव्यांग सेवाओं के ढांचे को नई सुविधाओं और आधुनिक संसाधनों के साथ मजबूत करने जा रही है।
नई सुविधाएँ — एक ही जगह सभी सेवाएँ
नए DDARC खुलने के बाद दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर निम्न सुविधाएँ मिल सकेंगी—
सर्वे, पहचान और चिकित्सा शिविर
सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग फिटमेंट
फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी सहित नैदानिक सेवाएँ
प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाएँ
UDID कार्ड और दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया
इससे लोगों को अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और योजनाओं का लाभ तेजी से और आसानी से मिल सकेगा।
कानपुर व बरेली की पेयजल व्यवस्था में बड़ा सुधार
कैबिनेट ने अटल नवीकरण एवं शहरी रूपांतरण मिशन (AMRUT 2.0) के तहत कानपुर और बरेली नगर निगम क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुधारने और नेटवर्क विस्तार की दो बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 582.74 करोड़ रुपये है।
बरेली: 9 लाख लोगों को मिलेगा सुरक्षित पेयजल
बरेली नगर निगम क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए फेज-1 परियोजना को 26,595.46 लाख (265.95 करोड़) की स्वीकृति दी गई है।
वित्तीय हिस्सेदारी इस प्रकार रहेगी—
केंद्र सरकार: 8,530.96 लाख
राज्य सरकार: 14,504.95 लाख
नगर निगम: 2,559.55 लाख
परियोजना पूरी होने के बाद बरेली की लगभग 92% आबादी (करीब 9 लाख लोग) को नियमित, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा।
कानपुर: 33 वार्डों में 100% आबादी तक पहुँचेगा शुद्ध पानी
कानपुर नगर निगम के ईस्ट और साउथ सर्विस डिस्ट्रिक्ट में पाइपलाइन विस्तार परियोजना को 31,678.88 लाख (316.78 करोड़) की मंजूरी दी गई है।
वित्तीय संरचना—
भारत सरकार: 7,610.32 लाख
राज्य सरकार: 18,264.77 लाख
नगर निगम: 4,566.19 लाख
परियोजना से 33 वार्ड, यानी ईस्ट और साउथ जोन की पूरी आबादी को स्वच्छ पेयजल प्राप्त होगा। इससे पानी की किल्लत दूर होने के साथ-साथ जलजनित रोगों में भी कमी आने की उम्मीद है।
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