एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को सदन में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। प्रश्नकाल के बाद विपक्षी दलों ने दोनों ही विषयों पर सरकार को घेरते हुए नियम 56 के तहत चर्चा कराने की मांग की, लेकिन सरकार का पक्ष सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों प्रस्तावों को अग्राह्य कर दिया।
एसआईआर के दौरान बीएलओ की मौत का मामला भी उठाया
एसआईआर का मुद्दा कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सदन में उठाया। उन्होंने मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए इसमें संशोधन और विस्तृत चर्चा की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने एसआईआर के दौरान बीएलओ की मौत का मामला भी उठाया और सरकार से जवाब मांगा।सरकार की ओर से वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण और देखरेख में की जा रही है।
सरकार मृतक कर्मियों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की
बीएलओ की मौत के मामले पर उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है और यह सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता कि मौत ड्यूटी के कारण हुई है। सरकार मृतक कर्मियों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करती है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि एसआईआर चुनाव आयोग की निगरानी में हो रहा है, इसलिए इस विषय पर सदन में चर्चा कराना नियमसम्मत नहीं है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ से अधिष्ठाता ने एसआईआर पर चर्चा की मांग को नियम 56 के तहत अग्राह्य कर दिया।
सदन में आरक्षण का मुद्दा भी उठा
इसके बाद सदन में आरक्षण का मुद्दा भी उठा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य डॉ. संग्राम यादव ने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्गों और दलितों को सरकारी नौकरियों में मानक के अनुरूप आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने पशुपालन विभाग की भर्ती प्रक्रिया और जारी विज्ञापन का हवाला देते हुए आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप लगाया। सपा सदस्य संदीप सिंह ने भी इस विषय पर चर्चा की मांग की।
किसी भी स्तर पर आरक्षण में गड़बड़ी नहीं हुई : सुरेश खन्ना
सरकार की ओर से सुरेश खन्ना ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योगी सरकार में आरक्षण के नियमों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर आरक्षण में गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।सत्ता पक्ष और विपक्ष की बात सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव को भी नियम 56 के तहत अग्राह्य कर दिया, जिसके साथ ही दोनों मुद्दों पर सदन में चर्चा नहीं हो सकी।
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