एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश शासन ने हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर अध्यापकों के लिए ऑनलाइन डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम तत्काल प्रभाव से शुरू करने का आदेश जारी किया है।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जारी किया शासनादेश
अब प्रदेश के करीब 1.33 लाख सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में काम कर रहे 4.50 लाख शिक्षकों को रोजाना विद्यालय खुलने के एक घंटे के भीतर अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी।अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, उपस्थिति दर्ज कराने की ज़िम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक को सौंपी गई है। यदि किसी स्थिति में प्रधानाध्यापक उपलब्ध न हों तो यह जिम्मेदारी संबंधित दूसरे शिक्षक को दी जाएगी।
नेटवर्क बाधित होने पर भी अनुपस्थित नहीं माना जाएगा
नई प्रणाली के तहत यदि इंटरनेट नेटवर्क की समस्या आती है तो हाजिरी ऑफलाइन मोड में दर्ज होगी और नेटवर्क उपलब्ध होने पर ऑटोमेटिक सिंक हो जाएगी। इस दौरान किसी शिक्षक को बिना कारण बताए अनुपस्थित नहीं चिह्नित किया जाएगा और न ही बिना पक्ष सुने कोई कार्रवाई होगी।
हाईकोर्ट के निर्देश पर फिर सक्रिय हुआ विभाग
यह व्यवस्था पहले वर्ष 2024 में लागू की जानी थी, लेकिन शिक्षकों के विरोध के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। इसके बाद कोर्ट में याचिका पहुंची और 16 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विभाग शिक्षकों की उपस्थिति की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करे।
वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षा विशेषज्ञों की एक समिति गठित
इसी क्रम में शासन ने वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षा विशेषज्ञों की एक समिति गठित की, जिसमें —महानिदेशक स्कूल शिक्षा ,निदेशक समाज कल्याण व अल्पसंख्यक कल्याण, निदेशक बेसिक शिक्षा व एससीईआरटी, बीएसए लखनऊ, सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन, शिक्षक प्रतिनिधि को शामिल किया गया।
समिति की 6 नवंबर को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था को बिना देरी लागू करना आवश्यक है।शासन ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को निर्देशित किया है कि वह सभी जिलों में इस व्यवस्था को सख़्ती से लागू कराएं और प्रगति रिपोर्ट शासन को नियमित रूप से भेजें।
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