एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर हलचल मच गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद प्रदेश की मतदाता सूची से करीब 2 करोड़ 88 लाख नाम हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है।
12 करोड़ 55 लाख मतदाताओं के फार्म जमा हुए थे
आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 12 करोड़ 55 लाख मतदाताओं के फार्म जमा हुए थे, लेकिन SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 9 करोड़ 67 लाख रह गई। सबसे अधिक कटौती गाजियाबाद जिले में हुई, जहां 31 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 28 प्रतिशत है।
लखनऊ में 12 लाख 82 हजार मतदाता सूची हो गए बाहर
लखनऊ में 12 लाख 82 हजार और बलरामपुर में 1 लाख 60 हजार मतदाता सूची से बाहर हो गए। अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में कटौती हुई है। मेरठ में 24 प्रतिशत, नोएडा में 23.98 प्रतिशत, आगरा में 23.25 प्रतिशत, कानपुर नगर सीट पर 25.50 प्रतिशत और प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत मतदाता सूची से हट गए। बलरामपुर जिले में SIR के दौरान करीब 26 प्रतिशत मतदाता गायब पाए गए।
बदलाव को लेकर राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन सतर्क
इस बड़े बदलाव को लेकर राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन सतर्क हैं। सभी की निगाहें अब चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं। आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया चुनाव की निष्पक्षता और मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी।
नाम हटने से आगामी चुनावों में मतदाता सूची पर प्रभाव पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से आगामी चुनावों में मतदाता सूची पर प्रभाव पड़ेगा और चुनावी रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।लोक प्रशासन और राजनीतिक हलकों में इस बदलाव पर चर्चा जारी है, जबकि आम जनता में भी मतदाता सूची की शुद्धता और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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