दीपक यादव, लखनऊयोगी सरकार ने जहां अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। वहीं बिजली विभाग के अफसर अभी भी पुराने ढर्रे पर काम करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, प्रदेश में अभियंताओं ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाने वाले साढ़े चार हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के कनेक्शन मैनुअली काट दिए। मामला संज्ञान में आने पर निदेशक ने अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए हैं।

53 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे

यूपी में 53 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट फोन की तरह ये मीटर पूरी तरह स्वचालित ऑनलाइन प्रणाली पर काम करते हैं। उपभोक्ता के खाते में शेष राशि कम और बकाया होने पर बिजली सप्लाई स्वतः ही कट जाती है। रिचार्ज करने पर सप्लाई चालू होती है। इसके बावजूद प्रदेश में 4702 उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर कनेक्शन पोल पर सीढ़ी लगाकर काट दिए गए। 

ऊर्जा निगम के निदेशक ने लगाई रोक

मामला संज्ञान में आने पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (तकनीकी) ने अभियंताओं और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का पोल से कनेक्शन काटना और लाइन उतारना पूरी तरह अनुचित है। चूंकि यह डिजिटल प्रणाली है। ऐसे में कनेक्शन काटने और जोड़ने के काम ऑनलाइन होगा। उन्होंने अभियंताओं और कर्मचारियों को स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम पर विशेष प्रशिक्षण दिए जाने का निर्देश भी दिया है।

मीटर स्मार्ट पर अभियंता नहीं

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मीटर स्मार्ट कर दिया, लेकिन अभियंता स्मार्ट नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभियंताओं और कर्मचारियों को भी स्मार्ट मीटर को लकेर आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाए। ताकि पुरानी कार्य प्रणाली समाप्त होकर उपभोक्ताओं को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

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