एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । स्तन कैंसर को लेकर उम्र के साथ लापरवाही नहीं बल्कि समझदारी बढ़ती दिख रही है। राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई के इंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जरी विभाग द्वारा किए गए एक अहम अध्ययन में सामने आया है कि 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं, कम उम्र की महिलाओं की तुलना में बीमारी के शुरुआती चरण में ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंच जाती हैं। इसके उलट 40 वर्ष से कम उम्र की बड़ी संख्या में महिलाएं देर से चिकित्सकीय मदद लेती हैं, जिससे उनकी जान को ज्यादा खतरा रहता है।
स्तन कैंसर पीड़ित 737 महिलाओं पर आधारित
यह अध्ययन वर्ष 2017 से 2021 के बीच पीजीआई में इलाज के लिए पहुंची स्तन कैंसर पीड़ित 737 महिलाओं पर आधारित है। इन महिलाओं की औसत आयु करीब 50 वर्ष थी। शोधकर्ताओं ने मरीजों को उम्र के आधार पर तीन वर्गों में बांटा—40 वर्ष से कम, 41 से 69 वर्ष और 70 वर्ष से अधिक। इसके बाद यह विश्लेषण किया गया कि महिलाएं बीमारी के किस चरण में अस्पताल पहुंचीं, इलाज के बाद उनका सर्वाइवल कितना रहा और कैंसर से मृत्यु दर क्या रही।
मृत्यु दर के आंकड़ों ने भी चौंकाया
अध्ययन के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक आयु की 70.7 प्रतिशत महिलाएं स्तन कैंसर के शुरुआती चरण में ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंच गईं। वहीं 41 से 69 वर्ष के आयु वर्ग में यह आंकड़ा 54.5 प्रतिशत रहा। सबसे चिंताजनक स्थिति 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं की रही, जहां केवल 51.4 प्रतिशत मरीज ही शुरुआती अवस्था में अस्पताल पहुंच सकीं।मृत्यु दर के आंकड़ों ने भी चौंकाया। सबसे अधिक मौतें 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में दर्ज की गईं, जहां मृत्यु दर 12.9 प्रतिशत रही। 41 से 69 वर्ष के समूह में यह आंकड़ा 9.9 प्रतिशत और 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में 9.7 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में औसतन जीवित रहने की अवधि कुछ कम रही, लेकिन समय पर इलाज के चलते मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम पाई गई।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी भूल साबित होती
अध्ययन से जुड़े डॉक्टरों—डॉ. रिनेले मैसकरहेनेस, डॉ. एम. मायीलवेगनन, डॉ. ज्ञान चंद, डॉ. अंजलि मिश्रा और डॉ. गौरव अग्रवाल—का कहना है कि स्तन कैंसर की समय रहते पहचान और इलाज से मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। डॉ. ज्ञान चंद के अनुसार, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी भूल साबित होती है, खासकर युवा महिलाओं में।डॉक्टरों ने बताया कि स्तन में गांठ महसूस होना, त्वचा का सख्त या मोटा होना, निप्पल का अंदर की ओर धंसना, स्तन के रंग या आकार में बदलाव, त्वचा पर पपड़ी या छिलन जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते जांच कराना जान बचा सकता है।
कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्तन कैंसर के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जिनमें आनुवंशिक जोखिम, हार्मोनल बदलाव, कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना, देर से रजोनिवृत्ति, अधिक उम्र में पहला बच्चा होना, मोटापा, असंतुलित जीवनशैली और बढ़ता प्रदूषण प्रमुख हैं। डॉक्टरों ने महिलाओं से अपील की है कि वे जागरूक रहें, नियमित जांच कराएं और किसी भी लक्षण पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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