एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । पांच साल पुराने सरिया चोरी के एक मामले में निर्दोषों को झूठे आरोप में फंसाने के आरोप पर बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर और चार दरोगाओं के खिलाफ पीजीआई थाने में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मुकदमा एंटी करप्शन विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज कराया गया है।
सरिया के फर्जी चोरी के मामले में भेज दिया था जेल
एंटी करप्शन में तैनात इंस्पेक्टर नुरुल हुदा के मुताबिक, 31 दिसंबर 2020 को बंथरा पुलिस ने लोहा कारोबारी विकास गुप्ता और ट्रक चालक दर्शन जाटव को सरिया चोरी के फर्जी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में आरोपियों के नाम पर आधार बनाकर ग्रामीणों लालता सिंह, उनके बेटे कौशलेंद्र, सतीश सिंह और कल्लू गुप्ता को भी आरोपित बनाकर गिरफ्तार किया गया था।
रंजना सिंह ने शासन से लेकर डीजीपी तक की थी शिकायत
इन गिरफ्तारियों के विरोध में पूर्व बीडीसी सदस्य रंजना सिंह ने शासन से लेकर डीजीपी तक शिकायत की थी। जिसके बाद मामले की जांच एंटी करप्शन को सौंपी गई। जांच में पाया गया कि चोरी का यह पूरा मामला मनगढ़ंत और षड्यंत्रपूर्ण था।इस जांच के बाद पीजीआई थाने में तत्कालीन इंस्पेक्टर क्राइम प्रहलाद सिंह और दरोगा संतोष कुमार, राजेश कुमार, दिनेश कुमार तथा आलोक कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इनमें आरोप है कि साजिश के तहत झूठे साक्ष्य तैयार कर बेगुनाहों को जेल भेजा गया।
दरोगा आलोक कुमार सिंह वर्तमान में पुलिस लाइन में तैनात
सूत्रों के अनुसार, दरोगा आलोक कुमार सिंह वर्तमान में पुलिस लाइन में तैनात हैं और उनके निलंबन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं अन्य आरोपी पुलिसकर्मियों के बहराइच में होने के चलते वहां के पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने कहा कि मामले की विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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