एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा द्वारा शनिवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के नेताजी सुभाष चंद्र प्रेक्षाग्रह में आयोजित साइबर जागरूकता कार्यशाला का शुभारंभ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया।इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन भानु भास्कर, पुलिस उपमहानिरीक्षक मेरठ परिक्षेत्र कलानिधि नैथानी, प्रभारी कुलपति हरेकृष्ण जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ विपिन टाडा और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के मिशनशक्ति प्रभारी प्रोफेसर बिंदु शर्मा उपस्थित रहे।

समाज का कोई भी वर्ग अब साइबर अपराध से नहीं रहा अधूरा

कार्यशाला में व्यापारी संगठन के पदाधिकारी, विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों की छात्राएं और छात्र जैसे गार्गी कॉलेज, केएल इंटरनेशनल और बीडीएस स्कूल की छात्राएं शामिल हुईं।डीजीपी राजीव कृष्णा ने अपने संबोधन में सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में निर्धारित दस प्राथमिकताओं में साइबर क्राइम सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि समाज का कोई भी वर्ग अब साइबर अपराध से अछूता नहीं है।

डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध बढ़ते जा रहे

बच्चों पर साइबर बुलिंग, महिलाओं पर साइबर स्टाकिंग, और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं।डीजीपी ने साइबर सुरक्षा के उपाय बताते हुए कहा कि मजबूत पासवर्ड, अपडेटेड सॉफ्टवेयर, अधिकारियों को तुरंत रिपोर्ट करना और सरकारी जागरूकता अभियान इस समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने आर्थिक अपराधों के शिकार लोगों के लिए तीन उपाय सुझाए: 1-1930 पर कॉल करना, 2- गोल्डन टाइम में रिपोर्ट करना, 3- सही तथ्यों को भरना।

डीजीपी ने साइबर जागरूकता बढ़ाने और सतर्क रहने का किया आग्रह

उन्होंने बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों के प्रति सतर्क रहने के लिए भी निर्देशित किया। डीजीपी ने बताया कि यूपी पुलिस द्वारा थानों के हेल्प डेस्क को और अधिक दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप पिछले दो महीनों में साइबर अपराधों से संबंधित 24 प्रतिशत धनराशि फ्रीज कराई गई।डीजीपी ने सभी से साइबर जागरूकता बढ़ाने और सतर्क रहने का आग्रह किया, ताकि डिजिटल दुनिया में होने वाले अपराधों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।

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