एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।आगामी छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बड़े आतंकी हमले की साजिश रचने का प्रयास हुआ, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया। राजधानी लखनऊ के खंदारी बाजार निवासी डॉ. शाहीन शाहिद और उसके भाई डॉ. परवेज अंसारी सहित पांच आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि डॉ. शाहीन इस गिरोह की मास्टरमाइंड थीं और उनका लक्ष्य सिर्फ दिल्ली नहीं, बल्कि यूपी के कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को निशाना बनाना था।

दिल्ली धमाके के बाद यूपी को भी बनाया था निशाना

सूत्रों के मुताबिक, लाल किला मैट्रो स्टेशन में हुए बम धमाके के बाद यह गिरोह लखनऊ, अयोध्या, मथुरा और काशी में बड़े पैमाने पर तबाही मचाने की योजना बना रहा था। डॉ. शाहीन और उसके सहयोगी देश विरोधी एजेंडों के तहत सक्रिय थे और उनका मकसद सामाजिक भय फैलाना और आतंक को बढ़ावा देना था।

लौटने के बाद वह फरीदाबाद और लखनऊ में सक्रिय रही

जांच में यह भी पता चला कि डॉ. शाहीन ने सऊदी अरब में करीब चार साल तक एक प्रमुख अस्पताल में काम किया। इसी दौरान उनका संपर्क कश्मीरी मूल के डॉक्टरों और संभावित आतंकियों से हुआ। लौटने के बाद वह फरीदाबाद और लखनऊ में सक्रिय रही।

एनआईए और एटीएस ने शुरू की गहन पड़ताल

जांच एजेंसियों ने लालबाग और मड़ियांव स्थित आवासों से बरामद दस्तावेजों, लैपटॉप, मोबाइल और हार्ड ड्राइव की गहन फोरेंसिक पड़ताल शुरू कर दी है। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से संपर्क कर डिजिटल उपकरणों की जांच की रिपोर्ट मंगवाई है। इसके अलावा एटीएस सहारनपुर और कानपुर में उनके वाहनों और सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।

एनआईए की टीम अयोध्या का भी रुख करेगी

सूत्रों के मुताबिक, डॉ. परवेज की गाड़ियों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। इसकी मदद से यह पता लगाया जाएगा कि क्या उनके जरिए अमोनियम नाइट्रेट, फर्टिलाइजर या अन्य विस्फोटक सामग्री कहीं भेजी गई थी। एनआईए की टीम अयोध्या का भी रुख करेगी, क्योंकि डॉ. परवेज ने अयोध्या में इंटर्नशिप की थी और वहां उसके संपर्कों की पड़ताल आवश्यक मानी जा रही है।

महिला आतंकी का नेटवर्क देशभर में फैला

एटीएस और पुलिस की जांच में यह सामने आया कि डॉ. शाहीन और उसके भाई के संपर्क में लखनऊ और यूपी के आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध हैं। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि यह गिरोह जम्मू-कश्मीर से लेकर यूपी तक सक्रिय था और उनका नेटवर्क कई शहरों और संस्थाओं तक फैला हुआ था। एनआईए और एटीएस इस नेटवर्क को पूरी तरह उजागर करने और देश के भीतर इसके संपर्कों को तोड़ने में जुटी हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने बड़े हादसों को रोका

विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आतंकी के सक्रिय होने से यूपी में बड़े आतंकी हमलों की गंभीर आशंका थी। लेकिन समय पर गिरफ्तारी और गहन जांच ने बड़े हादसों को टाल दिया। बरामद दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों से अब तक यह पता चला है कि गिरोह का दायरा दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या, मथुरा और काशी तक फैला हुआ था।

डॉक्टर शाहीन बम धमाके की मास्टरमाइंड बताई जा रही

बता दें कि डॉक्टर शाहीन बम धमाके की मास्टरमाइंड बताई जा रही है जबकि डॉ परवेज उसका सबसे भरोसेमंद मददगार बताया जा रहा है। इनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हैं इसके बारे में जांच एजेंसियां, एटीएस और पुलिस इनकी कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है।एनआईए और एटीएस की नजर अब गिरोह के पूरा नेटवर्क खंगालने, इसके सहयोगियों की पहचान करने और विदेशों से जुड़े कनेक्शन उजागर करने पर केंद्रित है। फोरेंसिक जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और संदिग्धों से पूछताछ के बाद ही गिरोह की पूरी साजिश उजागर हो पाएगी।

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