एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने आज कासगंज में आयोजित परिक्षेत्र स्तरीय साइबर जागरूकता कार्यशाला का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया। कार्यशाला में एडीजी आगरा जोन, डीआईजी अलीगढ़ परिक्षेत्र, जिलाधिकारी कासगंज, कासगंज, हाथरस, एटा और अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक, शिक्षण संस्थानों के शिक्षक-छात्र, व्यापारी संगठन, बैंक कर्मचारी, सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा ऑनलाइन माध्यम से जुड़े साइबर सेल अधिकारी मौजूद रहे। साइबर विशेषज्ञ अमित दूबे ने भी कार्यशाला में मार्गदर्शन दिया।

APK फाइल्स के जरिए फोन हैकिंग का बन चुका है खतरनाक तरीका

डीजीपी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के व्यापक उपयोग के कारण साइबर अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि साइबर बुलिंग, साइबर स्टॉकिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट को एक उभरता हुआ गंभीर खतरा बताया, जिसमें नागरिकों को सरकारी अधिकारी बनकर डराया जाता है।डीजीपी ने साइबर ठगी के तीन प्रमुख कारण लालच, भय और लापरवाही पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि APK फाइल्स के जरिए फोन हैकिंग अत्यंत खतरनाक तरीका बन चुका है, जिसे लेकर सभी को सावधान रहने की आवश्यकता है।

नागरिकों को साइबर अपराध से बचाव का यह दिये सुझाव

(1) तुरंत 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं,

(2) आधे घंटे के भीतर रिपोर्ट करना अत्यंत जरूरी है,

(3) सही और सटीक जानकारी दर्ज कराना अनिवार्य है।

साइबर सुरक्षा में जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण : डीजीपी

डीजीपी ने युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर भी चिंता जताई और कहा कि साइबर अपराध को रोकने के लिए बच्चों में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध की जांच सीखने तथा SOP आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।कार्यक्रम के अंत में डीजीपी ने कहा कि साइबर सुरक्षा में जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित डिजिटल उत्तर प्रदेश तभी संभव है, जब नागरिक और पुलिस मिलकर साइबर अपराध के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करें।

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