एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । यूपी की राजधानी में पुलिस आयुक्त के सख्ती के बाद भी अपराधों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। बेख़ौफ़ अपराधी या फिर हमलावर वारदात पर वारदात कर पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं। हत्या व महिलाओं से चेन छीनने की घटनाएं सिर्फ नहीं मारपीट की वारदात भी आम हो गई है। कमिश्नरेट में में खाकी के खौफ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने पिछले कुछ दिनों में जमकर तांडव मचाया और पुलिस उनके सामने नतमस्तक बनी रही।

देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई

हाल ही में मड़ियांव क्षेत्र के आईआईएम रोड पर स्थित कुटीर अपार्टमेंट में बेखौफ हमलावरों ने भाई-बहन की जमकर पिटाई की थी। यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित पुरनिया पेट्रोल पंप के सामने शुक्रवार की रात दो पक्षों के बीच शुरू हुई कहासुनी ने कुछ ही देर बाद ही माहौल को बदलकर रख दिया। वजह क्या थी लेकिन बेखौफ हमलावरों ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो में आतंक मचाते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।

कईयों के सिर फटे और हाथ-पैर में भी चोटें आई

सूचना मिलते ही पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन खाकी उनके आतंक के आगे घुटने टेकती नजर आई दिखी। पुलिस के सामने ही हमलावरों की उग्रता बढ़ती गई और खाकी वर्दी वाले बेबस होकर खड़े रहे।बताया जा रहा है कि इस दौरान कईयों के सिर फटे और हाथ-पैर में भी चोटें आई।

जमकर लात-घूंसों की बौछार होती रही

अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया क्षेत्र स्थित एक पेट्रोल पंप के सामने शुक्रवार रात मानो कुछ देर के लिए जंग का मैदान बना रहा। किस बात को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी हुई यह तो नहीं पता, लेकिन देखते ही देखते एक पक्ष के लोगो ने दूसरे पक्ष पर कहर बनकर टूट पड़े। जमकर लात-घूंसों की बौछार होती और चीख-पुकार भी मची रही। खास बात यह है यह तांडव खाकी वर्दी वालों के सामने होता रहा और पुलिस नतमस्तक दिखाई देती नजर आ रही थी। वैसे तो पुलिस किसी कमजोर पर झपट पड़ती है, लेकिन इस घटना ने पुलिस चौकसी की पोल खोल कर रख दी।

पुलिस पुलिसकर्मी मौन खड़े होकर तमाशा देख रहे थे

हमलावर घूम-घूमकर एक युवक पर लात-घूंसा बरसाते रहे, लेकिन पुलिस पुलिसकर्मी मौन खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो में देखें तो साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस डंडा घुमाते नजर आ रही थी लेकिन बेखौफ हमलावरों का उत्पाद बढ़ता चला गया। सवाल है कि आखिर पुलिस कमजोरों के लिए हमेशा भारी रहती, लेकिन कड़वा सच यह है ताकतवर हमलावरों के आगे क्यों घुटने टेक देती है?

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