एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । लोहे के कारोबार में चल रही संगठित टैक्स चोरी का जाल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है। जांच एजेंसियों को ऐसे ठोस प्रमाण मिले हैं जिनसे पता चला है कि एनसीआर के एक बड़े कर अपवंचक ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी कर दुबई में ठिकाना बना लिया है। इस गिरोह के करीब 200 से अधिक सहयोगी यूपी के सात जिलों में सक्रिय हैं, जो फर्जी नामों से सैकड़ों फर्में चलाकर आयरन स्क्रैप की खेप भेजने का काम कर रहे हैं।

कारोबारी भी टैक्स चोरी कर सिंगापुर और थाईलैंड में बस चुके

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस टैक्स चोरी सिंडीकेट की जड़ें दुबई, सिंगापुर और थाईलैंड तक फैली हुई हैं। दुबई में बैठे मुख्य सरगना के इशारे पर यहां 300 से अधिक फर्जी फर्मों के माध्यम से स्क्रैप की आपूर्ति की जा रही है। इसी तरह सेंट्रल यूपी से जुड़े दो अन्य कारोबारी भी टैक्स चोरी कर सिंगापुर और थाईलैंड में बस चुके हैं।

अकेले बुंदेलखंड क्षेत्र में 23.5 करोड़ रुपये का ITC फ्रॉड पकड़ा

सिंडीकेट के एजेंट बिहार और झारखंड से कबाड़ लाकर यूपी के वाराणसी, अलीगढ़, सहारनपुर और अन्य जिलों के रास्ते पंजाब तक भेज रहे हैं। वहां इसे बड़ी कंपनियां खरीदती हैं और इनवॉयस के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी दावा किया जाता है। अकेले बुंदेलखंड क्षेत्र में 23.5 करोड़ रुपये का ITC फ्रॉड पकड़ा गया है, जबकि कानपुर और आसपास के जिलों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा हो चुका है।

सहारनपुर में ढाई दर्जन वाहनों की जब्ती के बाद खुला राज

विभागीय जांच में यह भी सामने आया है कि कबाड़ के ट्रक बिहार-झारखंड से पंजाब तक यूपी के रास्ते में सुरक्षित गुजरें, इसके लिए एजेंटों का एक अलग नेटवर्क काम कर रहा है। हाल में सहारनपुर में ढाई दर्जन वाहनों की जब्ती के बाद इस नेटवर्क की सक्रियता और गहराई सामने आई।

सभी संदिग्ध फर्मों के भौतिक सत्यापन के आदेश जारी

शासन ने ऐसे मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सभी संदिग्ध फर्मों के भौतिक सत्यापन के आदेश जारी किए हैं, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि एक दिन में 30 फर्मों का सत्यापन करना संभव नहीं है, जिसके चलते अधिकांश जांच कागजी औपचारिकता तक सीमित है।

पंजाब व यूपी टैक्स चोरी का बना केंद्र

विभाग का मानना है कि यदि इस बड़े पैमाने की टैक्स चोरी को रोकना है तो नई पंजीकृत फर्मों का सत्यापन राज्य कर विभाग से अनिवार्य रूप से कराया जाए, चाहे वे केंद्रीय जीएसटी में पंजीकृत क्यों न हों।फिलहाल विभाग को आशंका है कि पंजाब और उत्तर प्रदेश टैक्स चोरी के नए केंद्र बन चुके हैं, जहां कबाड़ी और स्क्रैप कारोबारी नेटवर्क के जरिये अरबों की जीएसटी चोरी को अंजाम दे रहे हैं।

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