एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ‘ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की भदोही शाखा में नकली सोना गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का लोन लिया और फरार हो गए थे।

दोनों आरोपियों को उनके निवास स्थान से ईओडब्लू ने किया गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि शंकर वर्मा पुत्र मंगला प्रसाद, निवासी जद्दु मंडी, थाना लक्सा, वाराणसी और संतोष कुमार सेठ पुत्र बचानू सेठ, निवासी भोजपुर रतनपुर, थाना मुगलसराय, चंदौली के रूप में हुई है।

EOW लखनऊ और सेक्टर वाराणसी की संयुक्त टीम ने शनिवार को दोनों आरोपियों को उनके निवास स्थानों से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई मु0अ0सं0-93/2015 धारा 406, 419, 420, 467, 468, 471, 120B IPC के तहत दर्ज मामले में की गई।

लोन की राशि प्राप्त करने के बाद आरोपी फरार हो गए

जांच में सामने आया कि भदोही स्थित SBI शाखा में किसानों को एग्री गोल्ड लोन स्कीम के तहत ऋण दिया जाता था। आरोपियों ने बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से नकली सोने के आभूषणों को असली साबित करने के लिए मेसर्स श्री कृष्णा गोल्डवार टेस्ट लैब, वाराणसी के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाए।इसके बाद इन लोगों ने बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर और फर्जी खतौनी दस्तावेज जमा कर अलग-अलग तिथियों पर कुल 88,32,882 का लोन लिया। लोन की राशि प्राप्त करने के बाद आरोपी फरार हो गए।

सरकारी आदेश पर मामले की जांच EOW वाराणसी को सौंपी गई

घटना के उजागर होने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक की तहरीर पर वर्ष 2015 में थाना भदोही में मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में सरकारी आदेश पर मामले की जांच EOW वाराणसी को सौंपी गई।जांच के दौरान इस वित्तीय धोखाधड़ी में कुल 26 आरोपियों की संलिप्तता पाई गई, जिनमें से 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की जा चुकी है। शेष वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।

ऑपरेशन शिकंजा’ की एक और बड़ी सफलता

EOW ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों को रविवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, भदोही की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।EOW के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी आर्थिक अपराधियों पर चलाए जा रहे सघन अभियान ‘ऑपरेशन शिकंजा’ की एक और बड़ी सफलता है। इस अभियान के तहत बैंक धोखाधड़ी, फर्जी लोन और अन्य वित्तीय घोटालों में शामिल फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। यह मामला न केवल बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि वित्तीय अपराधों के विरुद्ध सतर्कता और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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