एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने एनसीआर क्षेत्र के उद्यमियों और बिल्डरों को झूठी शिकायतों के जरिए परेशान कर रंगदारी वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें गिरोह का सरगना अंकुर गुप्ता, उसके साथी हरनाम धवन और नरेन्द्र धवन शामिल हैं।गिरफ्तार गिरोह लंबे समय से गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के बिल्डरों को झूठी शिकायतों व मीडिया में खबरें छपवाने की धमकी देकर वसूली करता था।

अब तक कई उद्यमियों ने शिकायतें दर्ज कराई

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के खिलाफ अब तक कई उद्यमियों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं।एसटीएफ लखनऊ को सूचना मिली थी कि एनसीआर में एक गिरोह उद्यमियों को फर्जी शिकायतों और मीडिया की आड़ में परेशान कर रहा है। इसके बाद एसटीएफ नोएडा यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा के पर्यवेक्षण और पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सचिन कुमार व अन्य अधिकारियों की टीम ने जांच शुरू की।

उन्होंने बिल्डर से पहले 15 करोड़ रुपये की मांग की

जांच में पता चला कि गिरोह ने हाल ही में एक बड़े बिल्डर के खिलाफ विभिन्न विभागोंजैसे ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स, रेरा, ईओडब्ल्यू, जीएसटी आदि में शिकायतें कीं और इन शिकायतों को आधार बनाकर समाचार पत्रों व यूट्यूब चैनलों पर नकारात्मक खबरें प्रकाशित कराईं।

इसके जरिए उन्होंने बिल्डर से पहले 15 करोड़ रुपये की मांग की, बाद में रकम घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी। बिल्डर से कुछ रकम वसूल भी ली गई। जांच के बाद एसटीएफ टीम ने 29 सितंबर को दिल्ली के सराय रोहिल्ला थाना क्षेत्र से तीनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और 30 सितंबर की रात करीब 12:30 बजे गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र में विधिवत गिरफ्तार कर लिया।

सरगना अंकुर गुप्ता ने बताया कि वह 12वीं पास

इनके कब्जे से एसटीएफ ने 4 मोबाइल फोन, 62,720 नगद, 1 अमेरिकी डॉलर, 1 फर्जी आधार कार्ड, 17 डाक रसीदें बरामद हुई है। पूछताछ में सरगना अंकुर गुप्ता ने बताया कि वह 12वीं पास है और दरियागंज में कपड़े की दुकान चलाता था। कर्ज न चुकाने के कारण बैंक की कार्रवाई झेलनी पड़ी।

इसी दौरान उसे पता चला कि झूठी शिकायतों के जरिए लोगों को परेशान कर पैसे वसूले जा सकते हैं।धीरे-धीरे उसने दिल्ली व एनसीआर के बिल्डरों और उद्यमियों को निशाना बनाना शुरू किया। उसने अपने साथ छोटे अखबारों व यूट्यूब चैनलों से जुड़े कुछ पत्रकारों को भी जोड़ लिया।

घर खरीदने वाले लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा

इनमें गिरफ्तार नरेन्द्र धवन और उसका बेटा हरनाम धवन शामिल हैं। ये लोग झूठी शिकायतों को आधार बनाकर खबरें चलाते, जिससे उद्यमियों की छवि खराब होती और वे मजबूर होकर रंगदारी देने लगते।इस गिरोह की वजह से कई बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर असर पड़ा। इंदिरापुरम के शिप्रा और साया बिल्डर, हार्मनी बिल्डर और ग्रेटर नोएडा के केशवकुंज प्रोजेक्ट सहित कई प्रोजेक्ट्स में शिकायतों की वजह से देरी हुई, जिससे घर खरीदने वाले लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ा।

इस मामले में एक अपराधी दिल्ली से पहले जा चुका है जेल

एसटीएफ की जांच में पता चला कि गिरोह के निशाने पर करोलबाग का यूनिटी ग्रुप, गाजियाबाद के शिप्रा व साया बिल्डर और कई अन्य प्रोजेक्ट थे। इसके अलावा आरोपी हरनाम धवन पहले भी साल 2021 में बसंत कुंज, दिल्ली से एक आपराधिक मामले में जेल जा चुका है।

यह भी पढ़े : मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर, ढेर हुआ 1 लाख का इनामी बदमाश नईम कुरैशी

यह भी पढ़े : बागपत में जेल से रिहा हुए 1199 आरोपितों ने थाने में अपराध न करने की ली शपथ

यह भी पढ़े : लखनऊ पुलिस की महिला आरक्षियों ने जागरूकता दौड़ में दिखाया उत्साह

यह भी पढ़े : लखीमपुर खीरी हादसा : रोडवेज बस और वैन में भीषण टक्कर, पांच की मौत, नौ घायल

यह भी पढ़े : महाकुंभ की सफलता पर यूपी फायर सर्विस को मिला अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *