संजीव सिंह,बलिया। जनपद बलिया में जिला क्रीड़ा समिति की बिना बैठक के ही खेल कैलेंडर जारी करने और चयनकर्ताओं की नियुक्ति को लेकर खेल जगत में हड़कंप मच गया है। इससे पहले सचिव और कोषाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब नए आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेल कैलेंडर को निरस्त कर जांच की मांग की

तहसीली स्कूल की प्रधानाध्यापिका चमन आरा बेगम ने बिना संसाधनों के तीन खेलों के आयोजन की जानकारी मिलने पर विरोध जताते हुए बीएसए को पत्र भेजा है। साथ ही यह सवाल उठाया है कि जब 25 जुलाई को बैठक कोरम के अभाव में स्थगित हुई थी, तो खेल कैलेंडर कब और कैसे पास हुआ?बेसिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों ने भी डीआईओएस देवेंद्र गुप्ता पर मनमानी करने और बिना बैठक के पदाधिकारियों की नियुक्ति कर जनपद के खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। जिला व्यायाम शिक्षक विनोद कुमार सिंह ने भी डीआईओएस पर गंभीर आरोप लगाते हुए खेल कैलेंडर को निरस्त कर जांच की मांग की है।

प्रतियोगिता कराने पर भी विरोध जताया गया

स्थिति इतनी हास्यास्पद हो गई है कि तैराकी के चयन के लिए उस स्टेडियम में ट्रायल तय किया गया, जहां कोई तरणताल नहीं है। चयन तिथि के दिन कोई छात्र प्रतिभागी नहीं आया, जिससे चयनकर्ताओं की ‘घास पर तैराकी’ कराने की योजना पर सवाल उठे। फुटबॉल हब नरही को छोड़कर बेल्थरा रोड जैसे दूरस्थ क्षेत्र में प्रतियोगिता कराने पर भी विरोध जताया गया है।इसी प्रकार टेबल टेनिस, बैडमिंटन, भारोत्तोलन जैसे इनडोर खेलों की प्रतियोगिताएं उन विद्यालयों में रखी गई हैं जहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में बलिया के नाम पर हुए विवाद

बास्केटबॉल की प्रतियोगिता भी ऐसे स्कूल में कराई जा रही है, जहां कोर्ट तक नहीं है।पिछले वर्ष की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में बलिया के नाम पर हुए विवाद और फर्जी खिलाड़ियों की सहभागिता के कारण जनपद की छवि को जो नुकसान हुआ था, उसे देखते हुए इस बार भी हालात वैसी ही दिशा में जाते दिख रहे हैं। शिक्षकों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर खेल कैलेंडर निरस्त करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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