एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । अगर समय रहते पुलिस सुन लेती, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता… यह टूटे हुए शब्द थे 22 साल के हृदयलाल की मां के, जो सोमवार को अपने बेटे की लाश को देखकर बेसुध हो गई थीं। हृदयलाल की हत्या सिर्फ 200 रुपये के विवाद में हुई। गांव के ही कुछ पट्टीदारों ने उसे बेरहमी से पीटा, वह कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा, और आखिरकार लखनऊ में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। लेकिन दुख सिर्फ यहां खत्म नहीं हुआ।

चलती एंबुलेंस से शव को सड़क पर गिराया

जब एंबुलेंस सोमवार शाम हृदयलाल का शव लेकर बालपुर बाजार पहुंची, तो परिवार का दर्द गुस्से में तब्दील हो गया। उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं बची थी उनका विश्वास प्रशासन से खत्म हो चुका था। वे चुप नहीं रहे, उन्होंने वही किया जो एक असहाय और उपेक्षित परिवार कर सकता है चलती एंबुलेंस से शव को सड़क पर गिरा दिया। हाईवे पर पड़ी एक लाश… और उसके चारों ओर न्याय की मांग करती चीखें। अब इसका वीडियो सोशल मीडियो पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस मौन, परिवार आक्रोशित

गोंडा-लखनऊ हाईवे पर मिनटों में भीड़ जमा हो गई। पुलिस मौके पर पहले से तैनात थी लेकिन वो हालात को संभाल नहीं पाई। लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, इंसाफ की मांग करने लगे।“अगर आरोपी दबंग हैं तो क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?” यह सवाल हृदयलाल के बड़े भाई ने मीडिया से पूछा।शव को सड़क से हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया, लेकिन इससे परिवार और भड़क गया। जब शवदाहगृह पहुंचाया गया, तब भी परिजनों ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, वे बेटे को अग्नि नहीं देंगे।

200 रुपये में छीन ली गई ज़िंदगी

गांव लक्ष्मणपुर जाट के गड़रियनपुरवा का रहने वाला हृदयलाल मेहनत-मजदूरी करता था। एक अगस्त को एक मामूली लेन-देन को लेकर हुए विवाद में उसे बेरहमी से पीटा गया। अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तीन दिन बाद वह जिंदगी की जंग हार गया।देहात कोतवाल संजय कुमार सिंह के मुताबिक, नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। परिजनों द्वारा आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलवाने और फांसी की मांग के साथ सड़क जाम की कोशिश की गई थी, जिसे रोका गया।प्रशासन का दावा है कि परिजनों से संवाद कर अंतिम संस्कार के लिए राजी करने की कोशिश की जा रही है।

एक मां का सवाल…

हृदयलाल की मां की आंखों में आंसू और होंठों पर एक ही सवाल था “मेरे बेटे को पहले पीटा, फिर मरने दिया… और अब हमें ही शांत रहने को कहा जा रहा है? ये कौन-सा इंसाफ है?”। सीओ सिटी आंनद राय के मताबिक पहले प्रदर्शन के दौरान देहात कोतवाली पुलिस के दो पुलिस कर्मी मौजूद थे। इस दौरान शव को एंबुलेंस से खींचने के बाद प्रदर्शन उग्र हो गया।जिसके बाद फोर्स बुलाई गई। परिजनों को समझा बुझाकर शांत कराया गया। इसके बाद परिजन शव को ले जाकर अंतिम संस्कार किया। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। ह्दयलाल की दो महीने पहले शादी हुई थी।

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