एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । राजधानी के इटौंजा पावर हाउस में गुरुवार सुबह ड्यूटी के दौरान एक दर्दनाक हादसे में संविदा कर्मी गौरव यादव (निवासी धरौरा) की 11,000 वोल्ट हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उपकेंद्र पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया, विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की और उचित मुआवज़ा व जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप बिना सप्लाई बंद किए शुरू की बिजली
गवाहों के अनुसार, गौरव यादव लाइन मरम्मत के लिए पोल पर चढ़ा ही था कि बिना सप्लाई बंद किए बिजली चालू कर दी गई। करंट लगते ही वह बुरी तरह झुलसकर नीचे गिर पड़ा। सहकर्मियों और ग्रामीणों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
बिना सुरक्षा उपकरण के कराए जाते हैं जानलेवा काम
ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि संविदा कर्मियों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 11,000 वोल्ट और 440 वोल्ट की लाइनों पर काम कराया जाता है, जबकि यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। सूत्रों के अनुसार, अवर अभियंता इटौंजा योगेश कुमार यादव पर संविदा व अकुशल श्रमिकों पर खतरनाक कार्य करने का दबाव बनाने के आरोप पहले भी लगे हैं। 25 जुलाई 2025 को भी एक अकुशल श्रमिक जितेंद्र मौर्य हादसे का शिकार हो चुका है, जिसका इलाज उसे निजी खर्चे पर कराना पड़ा था।
संविदा कर्मचारी संघ की मांग दोषियों पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने घटना की निष्पक्ष जांच, अवर अभियंता योगेश कुमार यादव पर विभागीय कार्रवाई और उनके वेतन से ₹20 लाख काटकर मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।
विभाग की सफाई उपभोक्ता के चेंजओवर में लीकेज से हुआ हादसा
बीकेटी डिवीजन के अधिशासी अभियंता के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह हादसा एक उपभोक्ता के परिसर में लगे चेंजओवर में लीकेज के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि कार्यरत कंपनी की ओर से मृतक के परिवार को मौके पर ही 1.5 लाख की आर्थिक सहायता दी गई है और एक सदस्य को नौकरी देने, निर्धारित मुआवजा व अन्य सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। दोषी उपभोक्ता के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
हादसे ने खोली सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल
इस घटना ने बिजली विभाग में संविदा कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
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