एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जीवाड़े की एक ऐसी जालसाज चेन को उजागर किया है, जो शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्वयं STF के नाम से फर्जी ईमेल आईडी बनाकर जनपदों के बीएसए, डीआईओएस और परीक्षकों को फर्जी नोटिस भेजता था। इन नोटिसों के जरिए वह शिक्षकों की गोपनीय जानकारियां जुटाकर उनसे पैसे ऐंठते थे। इस गिरोह के दो मुख्य सदस्य बजरंगी लाल गुप्ता और जयप्रकाश तिवारी को कौशाम्बी जनपद से गिरफ्तार किया गया है।

इस तरह से हुआ इनका खुलासा

STF को सूचना मिली कि कौशाम्बी के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को STF के नाम से एक संदिग्ध नोटिस मिला है जिसमें शिक्षकों की गोपनीय जानकारी मांगी गई थी। साथ ही उक्त जानकारी देने के लिए लगातार फोन कर दबाव बनाया जा रहा था। STF नोएडा की टीम ने निरीक्षक सचिन कुमार और उपनिरीक्षक सनत कुमार के नेतृत्व में जब इस सूचना की पुष्टि की, तो जांच का दायरा प्रयागराज तक पहुंचा।

दोनों आरोपी सड़क किनारे संदिग्ध हालत में मिले

फाफामऊ क्षेत्र में दोनों आरोपी सड़क किनारे संदिग्ध हालत में मिले, जिनसे पूछताछ के बाद भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, तीन फर्जी मोहरे, एक टैब और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। पूछताछ में जब यह बात सामने आई कि गिरोह कई वर्षों से शिक्षकों की फर्जी बहाली, बहाली रद्द कराने व नियुक्ति दिलाने के नाम पर ठगी कर रहा था, तो STF ने दोनों को गिरफ्तार कर मंझनपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

कौशांबी शिक्षक पद पर भर्ती हुआ था बजरंगी लाल

गिरफ्तार आरोपी बजरंगी लाल गुप्ता वर्ष 2013 में राजकीय हाईस्कूल, कौशाम्बी में शिक्षक के पद पर भर्ती हुआ था, लेकिन जांच में उसकी हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट फर्जी निकली, जिसके चलते उसे बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद वह ठगी की दुनिया में उतर गया। वर्ष 2016-17 में उसने शिक्षक भर्ती के नाम पर 17 अभ्यर्थियों से रुपये वसूले और फर्जी ज्वाइनिंग भी करा दी। इस सिलसिले में उसके खिलाफ झांसी जिले के गरोठा व मऊरानीपुर थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से कुछ मामलों में वह जेल भी जा चुका है।

शिक्षकों नोटिस दिखाकर करता था धन उगाही

बर्खास्तगी के बाद बजरंगी फर्जी नियुक्ति दिलाने और बर्खास्त शिक्षकों की बहाली कराने के नाम पर रुपये लेने लगा। वह बीएसए और डीआईओएस को STF या शिक्षा निदेशालय के नाम से नोटिस भेजता था और फिर संबंधित शिक्षकों को नोटिस दिखाकर उन्हें डराकर उनसे धन उगाही करता था। ऐसे फर्जी नोटिस उसके साथी जयप्रकाश तिवारी तैयार करता था।

फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर शिक्षकों की सेवा बहाल कराने का प्रयास

STF द्वारा पहले की गई जांच में प्रयागराज के 4 शिक्षकों के फर्जी दस्तावेज मिलने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। इस गिरोह ने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के नाम से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवाए ताकि सेवा समाप्ति को निरस्त कराया जा सके।

जयप्रकाश तिवारी की भूमिका भी रही सबसे अहम

दूसरा अभियुक्त जयप्रकाश तिवारी, फतेहपुर बीएसए कार्यालय में काम कर रहे एक कर्मचारी के साथ टाइपिंग का काम करता था। वहीं उसकी मुलाकात बजरंगी से हुई थी। वह बजरंगी के कहने पर विभिन्न अधिकारियों के फर्जी दस्तावेज व नोटिस तैयार करता और बजरंगी उन्हें विभिन्न संस्थानों तक भेजता था। ये दोनों STF, शिक्षा निदेशालय और अन्य सरकारी अधिकारियों के नाम से भी फोन कॉल कर संबंधित संस्थानों पर दबाव बनाते थे।

बरामदगी और आगे की कार्रवाई

अभियुक्तों के पास से वीर बहादुर पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अधिकारियों की फर्जी मोहरें भी बरामद हुई हैं। उनके खिलाफ थाना मंझनपुर, जनपद कौशाम्बी में भारतीय दंड संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उनके अन्य आपराधिक इतिहास की गहन जांच भी की जा रही है।

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